‘मेरा दिमाग’, News18 के सवाल पर क्यों बोलीं प्रियंका? सरकार को खूब सुनाया
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Priyanka Gandhi News: महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में पास न हो पाने के बाद सियासत गरमा गई है. प्रियंका गांधी ने सरकार को खुली चुनौती दी है कि पुराना बिल सोमवार को संसद में लाया जाए, ताकि साफ हो सके कि कौन महिलाओं के हक में है और कौन नहीं. उन्होंने आज प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार के मंशे पर कई सवाल दागे. उन्होंने कहा, सरकार की मंशा पूरी तरह साफ हो चुकी है. विशेष सत्र और विधेयक के मसौदे में बहुत जल्दबाजी की गई. प्रियंका गांधी ने News18 के सवालों का भी जवाब दिया.

प्रियंका गांधी ने सरकार को पुराना बिल लाने की चुनौती दी. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में है, लेकिन इस बार बहस सिर्फ समर्थन या विरोध की नहीं है. इस बार बहस बल्कि मंशा और टाइमिंग की भी है. लोकसभा में बिल के पास न हो पाने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर सीधा हमला बोला है और एक तरह से राजनीतिक ‘लिटमस टेस्ट’ सामने रख दिया है. उनका कहना है कि अगर सरकार सच में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गंभीर है, तो उसे पुराने महिला आरक्षण बिल को तुरंत सोमवार को संसद में पेश करना चाहिए वही बिल, जिसे कभी सभी दलों का समर्थन मिला था. यह बयान सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि एक खुली चुनौती है. न्यूज 18 इंडिया के सवाल का भी प्रियंका गांधी ने जवाब दिया. अपने जवाब में उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बिल लाने का मकसद खुद को महिलाओं का मसीहा दिखाना था. प्रियंका के मुताबिक अगर बिल पास हो जाता तो सरकार श्रेय लेती, नहीं होने पर विपक्ष को महिला विरोधी बताया जाता.
प्रियंका गांधी का बयान ऐसे समय में आया है जब विशेष सत्र के दौरान पेश किया गया महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक लोकसभा में जरूरी बहुमत हासिल नहीं कर सका. सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. एक तरफ सत्ता पक्ष विपक्ष को जिम्मेदार ठहरा रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष सरकार की रणनीति पर सवाल उठा रहा है. इसी टकराव के बीच प्रियंका गांधी ने यह साफ कर दिया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में है और अगर पुराना बिल लाया जाता है, तो वह उसका पूरा समर्थन करेगी. इससे यह बहस और दिलचस्प हो गई है कि असल में महिला आरक्षण को लेकर किसकी नीयत साफ है और कौन इसे राजनीतिक हथियार बना रहा है.
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पास न हो पाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है.
पुराने बिल पर सियासी टकराव तेज
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पास न हो पाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है. इसी बीच प्रियंका गांधी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, ‘सरकार को सोमवार को संसद बुलाकर वही पुराना महिला आरक्षण बिल लाना चाहिए, जिसे सभी दलों ने पहले पास किया था. तब पता चल जाएगा कि कौन महिला विरोधी है. हम सब इस बिल के समर्थन में वोट देंगे.’ उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है.
प्रियंका गांधी ने क्या-क्या कहा?
- प्रियंका गांधी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अब सरकार की मंशा पूरी तरह साफ हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष सत्र और विधेयक के मसौदे में बहुत जल्दबाजी की गई. उनके मुताबिक यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था, ताकि किसी भी तरह सत्ता में बने रहने का रास्ता तैयार किया जा सके. प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाओं के मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया गया और सरकार खुद को महिलाओं का मसीहा दिखाना चाहती थी, लेकिन असल बदलाव काम करने से आता है, न कि सिर्फ दावों से.
- उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के मुद्दों पर कांग्रेस का लंबा इतिहास रहा है और पार्टी ने हमेशा महिलाओं को अधिकार देने का काम किया है. प्रियंका गांधी के मुताबिक यह मामला असल में महिला आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन से जुड़ा था, इसलिए विपक्ष के लिए सरकार का समर्थन करना संभव ही नहीं था. उन्होंने कहा कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो सरकार को कैसे चुनौती दी जा सकती है, यह सभी ने देख लिया है. साथ ही उन्होंने मांग की कि सरकार 2023 का महिला आरक्षण बिल दोबारा लाए और अगर कोई संशोधन करना है तो करे, लेकिन महिलाओं को उनका हक जरूर दे. अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को देश को गुमराह करना बंद करना चाहिए.
गौरतलब है कि लोकसभा में पेश इस बिल को पास होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, लेकिन आंकड़े इसके पक्ष में नहीं गए. करीब 298 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध में वोट डाला. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि यह संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हुआ है. इसके साथ ही सरकार ने इससे जुड़े अन्य बिलों को भी आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया.
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि जब मुख्य विधेयक ही पारित नहीं हो पाया, तो उससे जुड़े अन्य प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है. वहीं, सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष ने एक बड़े सुधार को रोकने का काम किया है, जिसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था.
विपक्ष बनाम सरकार: आरोपों का दौर
भाजपा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे को भी राजनीति का शिकार बना दिया. गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने इस ऐतिहासिक बिल को रोककर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है और इसके राजनीतिक परिणाम भी होंगे.
विपक्ष का पक्ष: समर्थन लेकिन शर्तों के साथ
विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़ना गलत है. कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह कदम चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश है. विपक्ष का तर्क है कि अगर सरकार सच में महिला आरक्षण चाहती है, तो उसे बिना शर्त पुराने बिल को लागू करना चाहिए.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें
