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शहीदों के गुनहगार पर चला कानून का हथौड़ा, CRPF कैंप हमले के आरोपी की जमीन-मकान जब्त, 5 जवानों की गई थी जान

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जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बार फिर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है. 2017 में लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ (CRPF) कैंप पर हुए भीषण फिदायीन हमले के मामले में कार्रवाई करते हुए एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी फैयाज अहमद मगरे की अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है.

जब 5 जवानों ने दिया था सर्वोच्च बलिदान
यह मामला 30 दिसंबर 2017 की उस काली रात से जुड़ा है, जब जैश के तीन आतंकियों ने अत्याधुनिक हथियारों के साथ लेथपोरा कैंप में घुसपैठ की थी. इस कायरतापूर्ण हमले में सीआरपीएफ के 5 जांबाज जवान शहीद हुए थे. सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई में तीनों फिदायीन हमलावरों को ढेर कर दिया था, लेकिन साजिश की परतें फैयाज मगरे जैसे ओजीडब्ल्यू (OGW) तक जा पहुंचीं.

NIA की कार्रवाई: घर और जमीन अब सरकारी कब्जे में
एनआईए की विशेष अदालत के आदेश पर UA(P) Act की धारा 33(1) के तहत यह कार्रवाई की गई है. कुर्क की गई संपत्तियों में शामिल हैं:

· पुलवामा के अवंतीपोरा (लेथपोरा) में स्थित कई जमीन के टुकड़े.

· आतंकी फैयाज मगरे का रिहायशी मकान.

· एजेंसी ने इन संपत्तियों को ‘आतंकवाद से अर्जित आय’ करार दिया है.

फैयाज मगरे, जिसे फरवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था, वह जैश के मास्टरमाइंड नूर मोहम्मद तांत्रे और मुदासिर अहमद खान के साथ मिलकर कैंप की रेकी करने और हथियार जुटाने का मुख्य आरोपी है.

टेरर फंडिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
संपत्ति कुर्की की यह कार्रवाई घाटी में सक्रिय आतंकियों और उनके मददगारों के लिए एक कड़ा संदेश है. एनआईए ने साफ कर दिया है कि आतंक की कमाई से खड़ा किया गया कोई भी आशियाना अब सुरक्षित नहीं है. यह कदम न केवल आतंकियों की आर्थिक सप्लाई लाइन काटता है, बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों की साजिश रचने वालों के मन में डर पैदा करता है.

सवाल-जवाब
फैयाज अहमद मगरे की हमले में क्या भूमिका थी?

एनआईए जांच के अनुसार, फैयाज एक सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर था. उसने हमले से पहले कैंप की रेकी की, आतंकियों के लिए हथियारों का बंदोबस्त किया और हमले के बाद मुख्य साजिशकर्ता मुदासिर खान को भागने में मदद की थी.

क्या इस हमले के अन्य मास्टरमाइंड अभी जीवित हैं?

नहीं, हमले की साजिश रचने वाले दोनों मुख्य आतंकी—नूर मोहम्मद तांत्रे और मुदासिर अहमद खान—अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षाबलों द्वारा पहले ही ढेर किए जा चुके हैं.

By uttu

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