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व्यापार संबंधों में नया मोड़:राष्ट्रपति ट्रंप का दावा- चीन 200 बोइंग जेट खरीदेगा, खबर के बाद शेयर 4% गिरे – Us-china Trade Relations Trump Claims China Will Buy 200 Boeing Jets Shares Drop After News Know Deal Details

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज चैनल को बताया कि चीन 200 बोइंग जेट खरीदने पर सहमत हो गया है। यह पहला मौका है जब बीते लगभग एक दशक में अमेरिका में निर्मित वाणिज्यिक जेट को चीन खरीदने वाला है। हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच होने वाले इस सौदे का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक खरीदारी की ये खबर आने के बाद बोइंग के शेयर में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

ट्रंप ने बोइंग की डील को लेकर क्या कहा?

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने ट्रंप के बयान और बोइंग की खरीदारी को लेकर टिप्पणी नहीं की है। खबर आने के बाद बोइंग के शेयर 4 फीसदी से अधिक गिर गए।चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के बाद  ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू के दौरान कहा, ‘एक बात जिस पर वह (चीन) आज सहमत हुए, वह 200 जेट का ऑर्डर देने जा रहे हैं… 200 बड़े वाले।’ (One thing he agreed to today, he’s going to order 200 jets … 200 big ones)। 

बोइंग के सीईओ ट्रंप के साथ चीन गए हैं, कौन सा मॉडल खरीदने पर सहमति?

ट्रंप के इस बयान के बावजूद ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्होंने सिंगल-आइजल 737 मैक्स या बड़े और अधिक महंगे ट्विन-आइजल 777X या 787 जेट में जिक्र कौन से मॉडल के विमान का किया है। खास बात ये है कि बोइंग मुख्य कार्यकारी अधिकारी केली ऑर्टबर्ग और जीई एयरोस्पेस मुख्य कार्यकारी अधिकारी लैरी कल्प उन अमेरिकी अधिकारियों के समूह में शामिल थे जो ट्रंप के साथ चीन गए थे।

अमेरिका की उम्मीद से काफी कम है 200 की संख्या

बता दें कि नवंबर 2017 में ट्रंप की यात्रा के दौरान, बीजिंग ने 300 बोइंग विमान खरीदने पर सहमति व्यक्त की थी। करीब नौ साल के बाद चीन दौरे पर गए ट्रंप की जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा के दौरान एक बड़े बोइंग ऑर्डर की घोषणा की उम्मीद है। हालांकि, 200 की संख्या अमेरिका की उम्मीद से कम है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक उद्योग जगत के सूत्रों ने चर्चा के दौरान कम से कम 500-जेट के सौदे की उम्मीद जताई थी। ऐसे में 200 बोइंग की खरीदारी पर सहमति आंकड़ों के लिहाज से काफी कम है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में हवाई यात्रा करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। एयरलाइंस विमानों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में मौजूदा स्थिति में जितने विमानों की जरूरत है, उसके मुकाबले 200 बोइंग जेट की डील आवश्यक नए विमानों की संख्या से काफी कम है।

बोइंग पर व्यापार विवाद का असर, एयरबस को फायदा कैसे?

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर हुए विवादों के कारण बोइंग दुनिया के दूसरे सबसे बड़े विमानन बाजार से बाहर हो गया है। बोइंग कंपनी को बीजिंग और वाशिंगटन के बीच तनाव के अलावा दो दुर्घटनाओं के बाद उपजी चिंताओं के कारण भी मार झेलनी पड़ी है। बोइंग उत्पादन समस्याओं के अलावा 737 मैक्स मॉडल से जुड़े संकट का भी सामना कर रहा है। नकारात्मकता के बीच प्रतिद्वंद्वी कंपनी- एयरबस ने चीनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यूरोपीय विमान निर्माता- एयरबस ने साल 2008 में तियानजिन में ए320 की असेंबली लाइन खोली। इससे चीनी एयरलाइंस को लुभाने में मदद मिली।

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चीन का बाजार कितना विशाल, भविष्य की जरूरतें कैसी?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन का विमानन बाजार इतना बड़ा है कि वह एयरबस जैसे केवल एक विमान निर्माता कंपनी पर निर्भर नहीं रह सकता। बोइंग और एयरबस दोनों के बाजार अनुमानों के अनुसार, चीन को 2045 तक कम से कम 9,000 नए जेटलाइनर की जरूरत होगी।

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क्या ट्रंप ने बोइंग के विमान खरीदने का दबाव बनाया?

खबरों के मुताबिक ट्रंप ने अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताओं के दौरान बोइंग विमानों की खरीद बढ़ाने के लिए कई देशों पर आक्रामक रूप से दबाव डाला था। उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, बोइंग सौदे पर अमेरिका और चीन के बीच कई महीनों से बातचीत चल रही थी। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार विवाद के कारण प्रयास विफल रहे। बोइंग मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऑर्टबर्ग ने पिछले महीने रॉयटर्स को बताया था कि ट्रंप प्रशासन से मिल रहे समर्थन के कारण कंपनी को पूरी उम्मीद है कि बोइंग चीन के साथ एक बड़े सौदे को अंतिम रूप देने में सफल रहेगी।

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By uttu

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