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महराजगंज के वनटांगिया कंपार्ट 24 गांव में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव, बरसात में बन जाता है टीला

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महराजगंज के जंगलों के बीच में एक गांव है वनटांगिया कंपार्ट 24, जो आज के आधुनिक समय में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी की वजह से जूझ रहा है. वर्तमान समय में जहां जिले के शहर और कस्बे बहुत तेजी से विकसित हो रहे हैं तो वहीं यह गांव आज भी जीवन के अलग-अलग कठिनाइयों से गुजर रहा है. यहां रहने वाले ग्रामीणों के लिए बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और आवागमन जैसे मूलभूत सुविधाओं की कमी होने की वजह से भी रोजाना संघर्ष करना पड़ता है.

महराजगंज: जिले का चौक क्षेत्र अपने घने जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. इन जंगलों के बीच में एक गांव है वनटांगिया कंपार्ट 24, जो आज के आधुनिक समय में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी की वजह से जूझ रहा है. वर्तमान समय में जहां जिले के शहर और कस्बे बहुत तेजी से विकसित हो रहे हैं तो वहीं यह गांव आज भी जीवन के अलग-अलग कठिनाइयों से गुजर रहा है.

यहां रहने वाले ग्रामीणों के लिए बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और आवागमन जैसे मूलभूत सुविधाओं की कमी होने की वजह से भी रोजाना संघर्ष करना पड़ता है. वनटांगिया के लोग एक लंबे समय से जंगलों के आसपास रहते आए हैं. जंगलों में रहने की वजह से वर्तमान समय में भी इनके गांव तक पहुंचना आसान नहीं होता है. यहां पर जाने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है बल्कि आपको कच्चे और ऊबड़ खाबड़ रास्तों से होकर ही गुजरना पड़ता है. खासकर बरसात के समय में तो स्थिति कुछ ऐसी हो जाती है कि लोगों का आवागमन भी बाधित हो जाता है.

गांव में सिर्फ एक ही इंटरलॉकिंगरास्ता

वनटांगिया कंपार्ट 24 गांव की बात करें तो यहां की स्थिति बरसात के समय में इतनी गंभीर हो जाती है कि गांव के रास्तों में कीचड़ ही कीचड़ और बहुत अधिक पानी भर जाने से इस गांव तक जाना मुश्किल हो जाता है. इसके साथ ही गांव में रहने वाले लोगों का घर से निकलना भी दुर्लभ हो जाता है. पक्की सड़क न होने, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी यहां की सबसे बड़ी समस्याओं में से है जिसकी वजह से यहां के लोगों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ता है. यदि किसी व्यक्ति की अचानक से तबीयत खराब हो जाए तो यहां से लेकर अस्पताल तक जाना ही एक मुश्किल भरा काम होता है.

बरसात के समय में स्थित कुछ ऐसी हो जाती है कि लोगों के आवागमन के दौरान दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं और उन्हें इसका सामना भी करना पड़ता है. जब हम इस गांव में जाते हैं तो गांव में सिर्फ एक ही सड़क देखने को मिलती है जो गांव के एक छोर से दूसरे छोर तक जाती है. इसी मुख्य मार्ग से गांव के अलग-अलग कच्चे रास्ते जुड़े हुए हैं जिसके दोनों साइड में कच्चे और घास–फूस से बने मकान और कुछ पक्के मकान भी दिखते हैं.

गांव में आज तक नहीं लगा बिजली का खंभा

आज के समय में जहां शहरों और कस्बे में दस मिनट बिजली कट जाती है तो लोग परेशान हो जाते हैं तो वहीं इस गांव में आज के समय में भी बिजली के पोल देखने को नहीं मिलता है. हालांकि घर के पास में छोटे-छोटे सोलर पैनल देखने को मिलते हैं. जिससे उन्हें थोड़ी सुविधा होती है. वहीं कई घर ऐसे भी हैं जहां सोलर पैनल भी नहीं है जिसकी वजह से शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता है और उनके रोजमर्रा के कार्यों में भी काफी दिक्कत होती है. इन बुनियादी सुविधाओं के न होने की वजह से यहां के लोगों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ता है और उनसे उनका दैनिक जीवन भी प्रभावित होता है. समय-समय पर क्षेत्र में विकास के दावे तो किए जाते हैं लेकिन ग्रामीण अंचलों में जाने पर देखा जाता है तो हालत बहुत गंभीर देखने को मिलते हैं जहां आज भी बहुत से परिवार मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

By uttu

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