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इंडिया जस्टिस रिपोर्ट:50 हजार बच्चों को अब भी इंसाफ का इंतजार, 362 जुवेनाइल बोर्ड में अब भी लंबित हैं 55% केस – India Justice Report: 50,000 Children Still Await Justice, 55 Percent Of Cases Pending In 362 Juvenile Boards

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भारत में 50,000 से अधिक बच्चे आज भी इंसाफ के इंतजार में हैं। वजह देश की धीमी रफ्तार वाली न्याय प्रणाली है। अब भी 362 जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) में आधे से ज्यादा मामले लंबित हैं। यह खुलासा इंडिया जस्टिस की नई रिपोर्ट (आईजेआर) में हुआ है। यह आलम तब है जब देश में 10 साल पहले ही जुवेनाइल जस्टिस एक्ट लागू कर दिया गया है।

जुवेनाइल जस्टिस एंड चिल्ड्रन इन कॉन्फ्लिक्ट विद द लॉ, ए स्टडी ऑफ कैपेसिटी एट द फ्रंटलाइन्स शीर्षक से प्रकाशित यह रिपोर्ट बताती है कि देश की न्याय प्रणाली में जजों की कमी, जुवेनाइल होम्स यानी बाल देखभाल गृह के अधूरे निरीक्षण, कमजोर डाटा प्रणाली और राज्यों के बीच भारी अंतर जैसी बड़ी कमियां न्याय देने में रुकावट डाल रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अक्तूबर, 2023 तक जेजेबी के सामने 100,904 केसों में से 55 फीसदी लंबित थे। भारत के 765 जिलों में से 92 फीसदी ने जेजेबी बनाए हैं लेकिन हर चार में से एक बोर्ड में पूरी बेंच नहीं है। औसतन, हर बोर्ड पर 154 मामलों का बैकलॉग है। क्राइम इन इंडिया के डाटा के मुताबिक, 2023 में आईपीसी और स्पेशल कानूनों के तहत 31,365 मामलों में 40,036 नाबालिग पकड़े गए। इनमें से तीन-चौथाई की उम्र 16 से 18 साल के बीच थी।

30% जेजेबी में लीगल सर्विस क्लिनिक नहीं

रिपोर्ट बताती है कि 30 फीसदी जेजेबी में लीगल सर्विस क्लिनिक नहीं है। देश के 14 राज्यों के साथ ही जम्मू-कश्मीर में 18 साल से ऊपर के बच्चों के लिए सुरक्षित जगहों की कमी है, यह 18 साल से अधिक के बच्चों को रखने के लिए जरूरी है। इन राज्यों में चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन (सीसीआई) की निगरानी भी कम हो पा रही है। इन राज्यों में 166 सीसीआई में जरूरी 1,992 निरीक्षणों में महज 810 ही किए गए। 292 जिलों के डाटा बताते हैं कि पूरे देश में लड़कियों के लिए महज 40 बाल देखभाल गृह हैं। यह बेहद चिंता का विषय है।

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किशोर न्याय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोई डाटा प्रणाली नहीं

रिपोर्ट में सामने आया कि किशोर न्याय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोई डाटा प्रणाली नहीं है। सामान्य अदालतों की तरह जेजेबी के लिए राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड भी नहीं है। नतीजन, आईजेआर टीम को 250 से अधिक आरटीआई फाइल करनी पड़ी। 28 राज्यों व 2 केंद्र शासित प्रदेशों से मिले 500 से अधिक जवाबों में से 11 फीसदी खारिज कर दिए गए।

By uttu

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