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S-400 का छोटा भाई, जहां THAAD और आयरन डोम हुआ फेल, वहां यह दिखाएगा पराक्रम – Carrier Air Defence Tracked system CADET Akashteer THAAD S-400

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S-400 का छोटा भाई, जहां THAAD-आयरन डोम हुआ फेल, वहां यह दिखाएगा पराक्रम

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Carrier Air Defence Tracked System: 21वीं सदी में एयर डिफेंस सिस्‍टम को एडवांस करते हुए उसे चाक-चौबंद करना काफी जरूरी हो गया है. रूस-यूक्रेन से लेकर ईरान जंग तक ने इस बात को साबित कर दिया है. हाल में ही ऐसी खबरें सामने आईं कि अमेरिका के पास भी ऐसा डिफेंस सिस्‍टम नहीं है जो हाइपरसोनिक एरियल थ्रेट को निष्क्रिय कर सके. यही वजह है कि डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार तकरीबन 175 अरब डॉलर की लागत से गोल्‍ड डोम डेवलप कर रहा है. वहीं, भारत भी मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्‍च कर देश को किसी भी तरह के हवाई हमले से सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है. अब इस प्रोजेक्‍ट को और मजबूती मिलने जा रही है.

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भारत अपने एयर डिफेंस सिस्‍टम को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए कैरियर एयर डिफेंस ट्रैक्‍ड सिस्‍टम खरीदने का फैसला किया है. (फाइल फोटो/Reuters)

Carrier Air Defence Tracked System: मॉडर्न वॉरफेयर में एरियल थ्रेट यानी हवाई हमले का खतरा काफी बढ़ गया है. फाइटर जेट्स के साथ ही अत्‍याधुनिक तकनीक से डेवलप की गई लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन ने युद्ध के तौर-तरीकों का पूरी तरह से बदल दिया है. इसे देखते हुए दुनिया के तमाम देश मजबूत और एडवांस एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप करने में जुटा है. अमेरिका ने अरबों डॉलर की लागत से गोल्‍डन डोम बनाने का ऐलान किया है. इस प्रोजेक्‍ट पर काम शुरू भी कर दिय गया है. अपुष्‍ट खबरों की मानें तो इस एयर डिफेंस सिस्‍टम को फ्यूचरिस्टिक वॉरफेयर को ध्‍यान में रखते हुए डेवलप किया जा रहा है. माना जा रहा है कि यह स्‍पेस वॉर में भी कारगर होगा. दूसरी तरफ, भारत किसी भी तरह के हवाई हमले को निष्क्रिय करने के लिए मल्‍टीलेयर एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्‍च किया है. S-400 इसका अहम हिस्‍सा है. अब इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है. अब ऐसे सिस्‍टम को एड करने की तैयारी चल रही है, जिसके सामने ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और अटैक हेलीकॉप्‍टर की एक नहीं चलेगी. यह नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर में गेमचेंजर साबित हो सकता है. यह सिस्‍टम वो काम करेगा, जिसे अंजाम देने में THAAD और आयरना डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम पस्‍त हो गए.

भारत की रक्षा तैयारी को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने 83 कैरियर एयर डिफेंस ट्रैक्ड (CADET) सिस्टम की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है. यह पहल भारतीय सेना की युद्धक क्षमता (War Doctrine) में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, जिसमें अब पारंपरिक खतरों के साथ-साथ आधुनिक और तेजी से विकसित हो रहे हवाई खतरों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. मौजूदा समय के युद्ध में खतरे का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. जहां पहले मुख्य रूप से लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर ही प्रमुख चुनौती माने जाते थे, वहीं अब ड्रोन, लो-रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) वाले छोटे टार्गेट, लोइटरिंग म्यूनिशन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अटैक हेलीकॉप्टर जैसी नई चुनौतियां सामने आ रही हैं. इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखते हुए CADET सिस्टम को डिजाइन किया जा रहा है, जो विशेष रूप से इन आधुनिक खतरों का मुकाबला करने में सक्षम होगा.

CADET सिस्टम क्‍यों खास?

CADET सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी नेटवर्क सेंट्रिक क्षमता है. इसे सेना के महत्वाकांक्षी आकाशतीर प्रोजेक्ट के साथ जोड़ा जाएगा, जो एक ऑटोमेटेड एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग सिस्टम है. इस इंटीग्रेशन के बाद CADET केवल एक स्वतंत्र हथियार प्रणाली नहीं रहेगा, बल्कि यह एक बड़े डिजिटल युद्ध नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा. इसके जरिए विभिन्न सेंसर, कमांड सिस्टम और हथियार प्लेटफॉर्म एक ही नेटवर्क में जुड़ेंगे, जिससे रियल-टाइम में पूरी हवाई स्थिति की जानकारी मिलेगी. इस नेटवर्किंग का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि लक्ष्य की पहचान और उस पर कार्रवाई की प्रक्रिया बेहद तेज हो जाएगी. साथ ही ‘फ्रैट्रिसाइड’ यानी अपने ही बलों पर गलती से हमले की आशंका भी काफी कम हो जाएगी. इसके अलावा यह सिस्टम भारतीय वायु सेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के साथ भी समन्वय स्थापित करेगा, जिससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित होगा.

CADET सिस्‍टम खरीदने की खबर ऐसे समय में आई है, जब रूस ने S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम के चौथे स्‍क्‍वाड्रन की डिलीवरी कर दी है. (फाइल फोटो/Reuters)

एक पंथ और कई काज

CADET प्लेटफॉर्म को एक मॉड्यूलर और स्‍टैंडराइज्‍ड ट्रैक्ड वाहन के रूप में विकसित किया जा रहा है. माना जा रहा है कि इसे या तो अपग्रेडेड BMP-2 सरथ चेसिस पर बेस किया जाएगा या फिर पूरी तरह स्वदेशी नए ट्रैक्ड प्लेटफॉर्म पर तैयार किया जाएगा. इस कॉमन प्लेटफॉर्म कॉन्‍सेप्‍ट के तहत एक ही वाहन पर अलग-अलग तरह के पेलोड लगाए जा सकेंगे. मिशन की जरूरत के अनुसार इसमें एंटी-एयरक्राफ्ट गन, शॉर्ट-रेंज मिसाइल सिस्टम या एडवांस सेंसर और कमांड मॉड्यूल लगाए जा सकते हैं. मोबिलिटी यानी गतिशीलता CADET सिस्टम की एक और अहम विशेषता है. पारंपरिक टो किए जाने वाले एयर डिफेंस सिस्टम के विपरीत यह ट्रैक्ड वाहन सेना के टैंक और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री के साथ समान गति से आगे बढ़ सकेगा. यह क्षमता विशेष रूप से स्ट्राइक कोर और अग्रिम मोर्चे पर तैनात इकाइयों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिन्हें हर समय हवाई सुरक्षा की जरूरत होती है.

आकाशतीर सिस्‍टम और CADET की जोड़ी

आकाशतीर सिस्टम इस पूरे ढांचे का नर्वस सिस्टम यानी केंद्रीय नियंत्रण तंत्र होगा. यह विभिन्न रडार और सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को इंटीग्रेट कर एक स्पष्ट और सटीक ऑपरेशनल तस्वीर तैयार करेगा. इससे CADET ऑपरेटरों को लक्ष्य की पहचान, ट्रैकिंग और उसे निष्क्रिय करने में अधिक सटीकता और तेजी मिलेगी. खासकर छोटे ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों की बढ़ती संख्या के बीच यह तकनीक बेहद अहम साबित होगी. CADET और आकाशतीर का यह संयोजन भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगा. यह न केवल आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी सेना को तैयार करेगा. कुल मिलाकर, यह पहल भारत की रक्षा रणनीति में तकनीकी उन्नयन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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