LIVE: 1 साल से AAP में बगावत की लिखी जा रही थी पटकथा, ऐसे चित्त हुए केजरीवाल
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AAP News Live: आम आदमी पार्टी में राघव चड्ढा की अगुवाई में हुई बगावत ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. 7 राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद केजरीवाल ने इसे गंभीर चुनौती के रूप में लिया है. पार्टी अब राज्यसभा चेयरमैन और राष्ट्रपति से शिकायत कर बागियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है. विवाद का केंद्र एंटी-डिफेक्शन कानून और 2/3 फॉर्मूला है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पार्टी के आधिकारिक विलय के यह कदम मान्य नहीं होगा. आने वाले दिनों में यह मामला संवैधानिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है. साथ ही एक और कहानी सामने आई है कि AAP में बगावत की आग 1 साल से जल रही थी.

AAP में बगावत के बाद केजरीवाल एक्शन मोड में हैं.
AAP Crisis Live: आम आदमी पार्टी (AAP) अब अस्तित्व बचाने की लड़ई लड़ रही है. पार्टी के अंदर उठी बगावत अब सिर्फ एक दल की अंदरूनी कलह नहीं रही है बल्कि यह संवैधानिक और राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुकी है. राघव चड्ढा के नेतृत्व में राज्यसभा के 7 सांसदों का पार्टी छोड़ना और फिर उनका दूसरी पार्टी की ओर रुख करना, सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल की सियासी पकड़ को चुनौती देता दिख रहा है. सवाल सिर्फ बगावत का नहीं है यह नहीं कि क्या संख्या बल के दम पर कानून को दरकिनार किया जा सकता है? राजनीति में नैतिकता बनाम गणित की यह लड़ाई अब खुलकर सामने आ चुकी है. केजरीवाल का मास्टर प्लान इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ राजनीतिक संकट से निकालने का नहीं बल्कि बागियों के खिलाफ कड़ी संवैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का संकेत देता है. पार्टी ने इस मुद्दे को संसद से लेकर राष्ट्रपति भवन तक ले जाने की रणनीति बना ली है. साथ ही इस मामले में एक और खबर सामने आई है कि AAP में पिछले एक साल से बगावत की पटकथा लिखी जा रही थी.
- AAP News Live: AAP नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि कई संवैधानिक विशेषज्ञों, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने स्पष्ट किया है कि यदि AAP को तोड़कर बीजेपी में विलय का फैसला लिया गया है, तो ऐसे सांसदों की सदस्यता रद्द हो सकती है.
- AAP News Live: आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता मनीष सिसोदिया ने कथित ‘शीशमहल’ आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए X पर पोस्ट किया. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, एक ‘उल्लू’ ने कल इंटरनेट से उठाकर ये तस्वीरें दिखाई और कहा ये शीशमहल है …. सारे ‘उल्लू के पट्ठे’ बोले हां-हां ये शीशमहल है … (मेरे शब्दों पर किसी को आपत्ति हो सकती है पर Pinterest की इन तस्वीरों को मेरे लीडर के घर की तस्वीरे बताकर पोस्ट करने वालों के लिए ‘उल्लू’ और उस उल्लू की हां में हां मिलाने वालों के लिए ‘उल्लू के पट्ठे’ से बेहतर शब्द बता दीजिए मैं अपनी वाणी सुधार लूंगा).
- AAP News Live: आम आदमी पार्टी (AAP) में राज्यसभा स्तर पर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा के हालिया कदम ने भले ही सुर्खियां बटोरी हों, लेकिन असंतोष की यह कहानी पिछले एक साल से धीरे-धीरे सुलग रही थी. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार AAP सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने दावा किया कि पार्टी के भीतर कई अहम नेताओं को दरकिनार किए जाने से नाराजगी बढ़ी. उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले संदीप पाठक को दिल्ली विधानसभा चुनाव हार के बाद लगभग किनारे कर दिया गया था.
- AAP News Live: साहनी के मुताबिक संदीप पाठक और राघव चड्ढा दोनों ही पार्टी में अपनी भूमिका कम होने से निराश थे. उन्होंने बताया कि पाठक कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके थे और कहा करते थे कि उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही. यही स्थिति राघव चड्ढा के साथ भी बनी रही जिसके चलते उन्होंने धीरे-धीरे पार्टी गतिविधियों से दूरी बना ली. उन्होंने आगे कहा कि राज्यसभा में राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाया जाना असंतोष का बड़ा कारण बना. इससे पार्टी के भीतर दरार और गहरी हो गई. साहनी ने कहा कि जिन नेताओं ने उन्हें राज्यसभा तक पहुंचाया वही खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे थे जिससे सांसदों ने आगे बढ़ने का फैसला लिया.
- AAP News Live: सूत्रों के मुताबिक पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कोशिश की थी. बताया गया कि उन्होंने कुछ नेताओं को अगली बार चुनाव टिकट देने का प्रस्ताव भी दिया और शुक्रवार शाम अपने आवास पर बैठक के लिए बुलाया था, लेकिन उससे पहले ही सांसदों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया.
- AAP News Live: साहनी ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने बुधवार को अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर अपने बीजेपी में जाने के फैसले की जानकारी दे दी थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने केजरीवाल को समझाया था कि अगर एक-दो सांसद इस्तीफा देते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत दो-तिहाई संख्या हासिल करना और आसान हो जाएगा.
- AAP News Live: ‘गद्दार’ कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए साहनी ने कहा कि उन्होंने पंजाब के साथ कोई धोखा नहीं किया है. उनका कहना था कि उन्होंने हाल ही में अमित शाह से मुलाकात कर पंजाब के मुद्दों पर चर्चा की है और उनका मानना है कि राज्य के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल जरूरी है.
- AAP News Live: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यसभा सभापति सी पी राधाकृष्णन से संपर्क कर बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है. संजय सिंह और भगवंत मान इस लड़ाई को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ा रहे हैं. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था है, जिससे इन सांसदों की सदस्यता खत्म कराई जा सके? या फिर यह बगावत नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म देगी?
- AAP News Live: इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब राघव चड्ढा ने ऐलान किया कि राज्यसभा में पार्टी के 10 में से 7 सांसद अलग होकर नई राह चुन रहे हैं. इन नेताओं में स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह और विक्रम साहनी जैसे नाम शामिल हैं. बागियों का दावा है कि वे 2/3 संख्या के साथ आए हैं, इसलिए एंटी-डिफेक्शन कानून उन पर लागू नहीं होगा. वहीं पार्टी का कहना है कि यह ‘मर्जर’ तभी वैध होता है जब पूरा संगठनात्मक फैसला लिया जाए.
कपिल सिब्बल क्या बोले?
इसी बीच कपिल सिब्बल ने भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ सांसदों का समूह अपने स्तर पर किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता. इसके लिए मूल पार्टी का आधिकारिक प्रस्ताव जरूरी होता है. पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने भी माना कि ये सांसद अयोग्यता से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. यानी आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी पेच में फंस सकता है.
क्या कहता है कानून?
भारत में दल-बदल विरोधी कानून साफ कहता है कि अगर 2/3 सदस्य किसी दूसरी पार्टी में ‘विलय’ करते हैं, तो उन्हें राहत मिल सकती है. लेकिन यह तभी संभव है जब पार्टी खुद इस फैसले को मंजूरी दे. यहां यही विवाद खड़ा हो गया है. AAP का दावा है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर लिया गया फैसला है, इसलिए इसे वैध नहीं माना जा सकता.
केजरीवाल का ‘मास्टर प्लान’ क्या है?
सूत्रों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल इस पूरे मामले को संवैधानिक स्तर तक ले जाकर बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करवाने की कोशिश में हैं. राज्यसभा चेयरमैन को पत्र लिखना, राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी और राजनीतिक दबाव बनान ये सभी कदम इसी रणनीति का हिस्सा हैं.
क्या 2/3 सांसदों के जाने से कार्रवाई नहीं होती?
नहीं, यह पूरी तरह स्थिति पर निर्भर करता है. अगर यह ‘विलय’ पार्टी के आधिकारिक फैसले से होता है, तभी राहत मिलती है. सिर्फ संख्या होने से कानून से बचाव नहीं मिलता.
क्या राष्ट्रपति सांसदों को वापस बुला सकते हैं?
नहीं, संविधान में ‘राइट टू रिकॉल’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है. राष्ट्रपति केवल संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही कोई कदम उठा सकते हैं.
अब आगे क्या हो सकता है?
मामला राज्यसभा चेयरमैन के पास जाएगा. वहां से जांच और सुनवाई के बाद फैसला लिया जाएगा. जरूरत पड़ने पर यह मामला अदालत तक भी जा सकता है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें
