POCSO आरोपी को जेल भेजना न्याय के खिलाफ, रोमियो-जूलिएट केस हाईकोर्ट का फैसला
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हाईकोर्ट ने मेघालय सरकार को कड़ा निर्देश दिया है. पीड़िता और उसके बच्चे को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए. इसमें मुआवजा और हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं शामिल हैं. शिक्षा और सुरक्षा की योजनाओं का भी फायदा मिलेगा. हाईकोर्ट के इस आदेश से आरोपी को राहत मिली है.

मेघालय हाईकोर्ट ने आरोपी को खिलाफ सभी कार्रवाई को रद्द कर दिया है. (सांकेतिक तस्वीर)
शिलॉन्ग. मेघालय हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में POCSO एक्ट के तहत दर्ज FIR और उससे जुड़ी कार्यवाही रद्द कर दी. अदालत ने कहा कि न्याय केवल कानून को सख्ती से लागू करने से नहीं, बल्कि हालात को समझते हुए संवेदनशीलता और इंसाफ के साथ फैसला लेने से होता है. कोर्ट ने कहा कि मेघालय में कम उम्र के लड़का-लड़की के आपसी सहमति वाले रिश्ते, जो बाद में शादी या साथ रहने तक पहुंच जाते हैं, असामान्य नहीं हैं. ऐसे मामलों में कानून का कठोर इस्तेमाल पीड़िता और बच्चे के लिए ज्यादा मुश्किलें पैदा कर सकता है.
हाईकोर्ट ने पाया कि लड़की और आरोपी अब पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे हैं और उनकी एक बेटी भी है, जो KG क्लास में पढ़ती है. अदालत को दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों अपनी जिंदगी खुशी से बिता रहे हैं. हालांकि, पीड़िता ने भी कोर्ट में कहा कि उसे केस खत्म करने पर कोई आपत्ति नहीं है. वहीं लड़की की मां ने हलफनामा देकर बताया कि FIR ‘गलतफहमी और भावनात्मक तनाव’ में दर्ज कराई गई थी और रिश्ता आपसी सहमति से था.
आरोपी को जेल भेजना न्याय के हित में नहीं
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी को जेल भेजना न्याय के हित में नहीं होगा. इसके बाद मदनरटिंग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR और ट्रायल कोर्ट में चल रही POCSO कार्यवाही को रद्द कर दिया गया. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़िता और उसके बच्चे को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ दिया जाए, जिसमें मुआवजा, स्वास्थ्य बीमा, शिक्षा और सुरक्षा योजनाएं शामिल हैं.
