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अमेरिका जैसी महाशक्ति अफगानिस्‍तान में क्‍यों हो गई चित? अजीत डोभाल ने बताया कड़वा सच

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अमेरिका जैसी महाशक्ति अफगानिस्‍तान में क्‍यों हो गई चित? डोभाल ने बताया सच

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NSA अजीत डोभाल ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की नहीं बल्कि पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने अमेरिका-अफगानिस्तान का उदाहरण देते हुए बताया कि अटूट नेशनल मोराल ही युद्धों का परिणाम तय करता है. डोभाल ने युवाओं को चेतावनी दी कि सुरक्षा में सिल्वर मेडल के लिए कोई जगह नहीं है; यहां केवल क्षमता, चरित्र और पूर्ण प्रतिबद्धता ही राष्ट्र को विजयी बना सकती है.

अमेरिका जैसी महाशक्ति अफगानिस्‍तान में क्‍यों हो गई चित? डोभाल ने बताया सचZoom

अजित डोभाल ने खुलकर अपनी बात कही.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने एक बार फिर देश की सुरक्षा को लेकर बड़ी और दोटूक बात कही है. हाल ही में एक यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की मानद उपाधि लेते हुए उन्होंने साफ किया कि किसी भी युद्ध का परिणाम केवल सेना या हथियारों से तय नहीं होता. डोभाल के अनुसार, राष्ट्र का मनोबल (National Morale) वह सबसे बड़ी शक्ति है जो जीत और हार के बीच की रेखा खींचती है. उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि दुनिया की बड़ी महाशक्तियों को भी उन देशों के सामने घुटने टेकने पड़े, जिनका मनोबल अटूट था.

अफगानिस्‍तान में क्‍यों हारा अमेरिका?
अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में रूस, अमेरिका और अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए एक कड़वी सच्चाई सामने रखी. उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसी महाशक्ति के पास दुनिया की सबसे आधुनिक टेक्नोलॉजी और बेहिसाब संसाधन थे. इसके बावजूद वह अफगानिस्तान में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सका. इसकी वजह यह थी कि वहां के लोगों का अपने राष्ट्र के प्रति संकल्प और इच्छाशक्ति बहुत मजबूत थी. डोभाल ने समझाया कि जब हम ‘नेशनल पावर’ का आकलन करते हैं, तो अक्सर जनता के मनोबल को भूल जाते हैं, जबकि यही सबसे बड़ी गलती होती है.

राष्ट्रीय सुरक्षा क्या केवल सेना की जिम्मेदारी है?
डोभाल ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया कि देश की सुरक्षा का जिम्मा केवल सेना या पुलिस का है. उन्होंने कहा कि भारत में अब एक नई जागृति की जरूरत है, जहां हर नागरिक खुद को सुरक्षा तंत्र का हिस्सा समझे. सुरक्षा एक सामूहिक प्रयास है और पूरे देश की सम्मिलित शक्ति ही एक मजबूत राष्ट्रीय मनोबल का निर्माण करती है. उनके अनुसार, रक्षा क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों, रिसर्चर्स और एकेडमीशियन का ज्ञान और उनकी जागरूकता इस मोर्चे पर बहुत प्रभावी भूमिका निभाती है.

इस खेल में सिल्वर मेडल क्यों नहीं होता?
युवाओं को संबोधित करते हुए अजीत डोभाल ने बहुत गंभीर बात कही. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का क्षेत्र किसी खेल के मैदान जैसा नहीं है, जहां दूसरे नंबर पर आने वाले को सिल्वर मेडल मिल जाए. यहां या तो आप विजयी होते हैं या फिर आप पूरी तरह धराशायी हो जाते हैं. इसमें दूसरे स्थान के लिए कोई जगह नहीं है. इसलिए इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के अंदर उच्च स्तर की प्रतिबद्धता (Commitment) और अनुशासन होना अनिवार्य है.

भविष्य के रक्षकों के लिए क्या है डोभाल का मंत्र?
NSA ने तीन मुख्य बातों पर जोर दिया- क्षमता, चरित्र और प्रतिबद्धता. उन्होंने कहा कि आपके पास केवल तकनीकी जानकारी होना काफी नहीं है, बल्कि आपका मानसिक चरित्र और टीम में काम करने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है. डोभाल ने बड़ी विनम्रता के साथ डॉक्टरेट की उपाधि स्वीकार करते हुए यह संदेश दिया कि देश के युवाओं को अपनी मानसिक शक्ति और अनुशासन के बल पर राष्ट्र को सुरक्षित बनाना होगा. उनके अनुसार, अगर जनता जागरूक है और उसका मनोबल ऊंचा है, तो दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

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