यूरोप में तेल और गैस की कीमतें कम से कम 2027 के अंत तक ऊंची बनी रह सकती हैं. यूरोपीय संघ (EU) के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान युद्ध के बाद ऊर्जा संकट का असर लंबे समय तक जारी रहेगा और इसका प्रभाव रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ेगा.
यूरोपीय संघ के इकोनॉमी कमिश्नर वाल्डिस डाब्रोव्स्की ने कहा कि बढ़ती ऊर्जा कीमतें महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह हैं. उन्होंने बताया कि इस साल यूरोजोन में महंगाई दर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2027 में यह 2.4 प्रतिशत रह सकती है. इससे पहले इस साल के लिए महंगाई का अनुमान 1.9 प्रतिशत लगाया गया था.
डाब्रोव्स्की ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ी महंगाई धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी असर डालेगी और वस्तुओं व सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ सकती हैं. वहीं यूरोपियन सेंट्रल बैंक की प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा कि अगर मध्य पूर्व का संघर्ष अभी समाप्त भी हो जाए, तब भी उसके देर से दिखने वाले प्रभाव बाजार में लंबे समय तक बने रहेंगे. उन्होंने कहा कि संकट खत्म होने के बाद भी वस्तुओं की कीमतें पहले के मुकाबले अधिक रहेंगी.
लेगार्ड ने कहा कि यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) मूल्य स्थिरता बनाए रखने और महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ के पास तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे संभावित मांग को पूरा किया जा सकता है. यूरोग्रुप के अध्यक्ष कुरियाकोस पिएराकाकिस ने कहा कि यूरोप के लिए संकट का अंत तभी माना जाएगा, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बिना किसी रुकावट और अतिरिक्त शुल्क के जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो जाएगी.
दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है. उन्होंने कहा कि यूरोजोन की आर्थिक वृद्धि इस साल 0.9 प्रतिशत और 2027 में 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. हालांकि, यह पहले के अनुमान से कम है, लेकिन यूरोप फिलहाल मंदी की स्थिति से दूर है.
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