लोग बोले- डटे हैं और डटे रहेंगे…
रोसा और हौसला यहां की मिट्टी में है। लोग बोले, डटे हैं, डटे रहेंगे। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सीमावर्ती गांव ज्योड़ियां की यही तस्वीर सामने आई है। मई के वो शुरुआती दिन की सुबह आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है, जब तड़के तीन बजे से लेकर सुबह तक रिहायशी इलाकों पर भारी गोलाबारी हुई थी। पंजतूत, गुजरेंवाला, लोअर और अप्पर नरायाणा समेत कई गांवों में गोले गिरे। जानी नुकसान तो बच गया, लेकिन कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। गांव पंजतूत पलांवाला के हंस राज बताते हैं कि उनके घर की छत चीरकर गोला कमरे में गिरा था। वे कहते हैं, घर फिर बन जाएगा, लेकिन वे दिन कभी नहीं भूल सकते।
एक साल बाद हालात सामान्य होने लगे हैं। खेतों में हरियाली लौट आई है और लोग फिर काम पर जुटे हैं, लेकिन हर आवाज पर चौंक जाना आज भी आदत में शामिल है। प्रशासन ने बंकर बनाए हैं, फिर भी ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं और अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम की मांग कर रहे हैं। डर अब भी है, लेकिन उससे बड़ा यहां के लोगों का हौसला है, जो हर हाल में डटे रहने का विश्वास देता है।
नहीं छोड़ी अपनी जमीन
रगवाल की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है। दो ओर पाकिस्तान की सीमा और तीसरी ओर दरिया चिनाब होने के कारण सुरक्षित स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। यह कहना है नई बस्ती निवासी वचन लाल का। उस पल को याद करते हुए कहते हैं, मैं अपने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेजने की सोच ही रहा था कि फायरिंग शुरू हो गई। हम जैसे ही बंकर में पहुंचे, जोरदार धमाका हुआ। बाद में देखा तो गोला हमारे घर पर गिरा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने अपनी जमीन नहीं छोड़ी और भारतीय सेना के साथ खड़े रहे।
दोबारा हिमाकत नहीं कर सका पाकिस्तान
लायन था, दहशत थी पर ये सुकून है कि पाकिस्तान दोबारा वैसी हिमाकत नहीं कर सका। ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा छिड़ते ही सीमावर्ती अरनिया सेक्टर के ज्यादातर लोग जो कुछ कहते हैं उसका सार यही होता है। बीते साल की गोलाबारी, अफरातफरी और पलायन की यादों के बीच अब लोग राहत की सांस ले रहे हैं और मानते हैं कि भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान दोबारा वैसी हिमाकत नहीं कर सका।
गांव चंगिया के पूर्व सरपंच रघुवीर सिंह बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र छिड़ते ही मुस्कुरा देते हैं। कहते हैं, कुछ भी हो ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई बड़ी हरकत नहीं हुई। यह बताता है कि भारत ने उसे कितनी चोट पहुंचाई। बीच रास्ते में कई लोगों से बातें हुईं। कई लोगों ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रशासन की सतर्कता और समय रहते बनाई गई रणनीति से बड़ा नुकसान बच गया। गांव चानना, अरनिया कस्बे के वार्ड नंबर 13 और आसपास के खेतों में मोर्टार शेल जरूर गिरे, लेकिन किसी बड़े जानमाल के नुकसान से लोग बच गए। उस समय हालात ऐसे थे कि लोगों को अचानक अपने घर छोड़कर सरकारी कैंपों में शरण लेनी पड़ी थी।
