ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान अराघची ने अमेरिका की उकसावे वाली कार्रवाइयों को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरनाक नतीजे देने वाला बताया। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका-ईरान के बीच हाल ही में इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई थी।
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार अराघची ने युद्धविराम के एलान और उसके बाद इस्लामाबाद में हुई ईरान-अमेरिका शांति वार्ता (11-12 अप्रैल) के बाद की क्षेत्रीय घटनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी उकसावे वाली कार्रवाइयों के क्षेत्रीय और वैश्विक शांति-सुरक्षा के लिए खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।
रूस बोला- लेबनान पर भी लागू होता है समझौता
वहीं, रूस के विदेश मंत्रालय ने बताया कि लावरोव ने ईरान के दो सप्ताह के युद्धविराम का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि मॉस्को का मानना है कि ये समझौते लेबनान पर भी लागू होते हैं। मंत्रालय के अनुसार, लावरोव ने यह भी कहा कि अमेरिका-इस्राइल की बेवजह आक्रामकता के नतीजों को दूर करने के लिए समाधान खोजने में रूस मदद करने को तैयार है।
रूसी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक एक्स पोस्ट के अनुसार लावरोव ने फिर से सशस्त्र टकराव के छिड़ने की संभावना पर इसे रोकने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस संकट को हल करने में सहायता के लिए रूस की अटूट तत्परता की पुष्टि की।
ईरान की नाकेबंदी में जुटा अमेरिका
इस बीच एक अमेरिकी नौसेना ने फारस की खाड़ी में कम से कम 15 युद्धपोत तैनात किए हैं। इनमें विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और 11 विध्वंसक युद्धपोत शामिल हैं। ये युद्धपोत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों के बाद ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी में संभावित रूप से भाग ले सकते हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कौन से विशिष्ट युद्धपोत नाकाबंदी में भाग लेने के लिए तैनात या नामित किए गए हैं, क्योंकि शुरुआती आकलन बताते हैं कि नौसैनिक संपत्तियां अमेरिकी सेंट्रल कमांड के संचालन क्षेत्र में व्यापक रूप से फैली हुई हैं।
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