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खुद पेट्रोल पंप बंद करने चले थे तब राष्ट्रहित था? नेहरू के चावल से इंदिरा की नसबंदी तक, जानें PM के फैसलों का इतिहास

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नई दिल्ली: राजनीति में सुविधानुसार याददाश्त खो देना कोई नई बात नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील पर विपक्ष का मौजूदा रिएक्शन उनके अपने इतिहास के आईने में धुंधला नजर आता है. आज जो विपक्ष प्रधानमंत्री की अपील पर लाल-पीला हो रहा है, उसने सत्ता में रहते हुए न सिर्फ जनता को नसीहतें दीं बल्कि कई बार ऐसे कड़े फैसले थोपे जिनका कोई तात्कालिक वैश्विक आधार भी नहीं था. न्‍यूज18 इंडिया के वरिष्‍ठ पत्रकार और आर-पार शो के होस्‍ट अमिश देवगन ने इसका गहराई से विश्‍लेषण किया.

इतिहास के पन्नों से कांग्रेस की नसीहतें
विपक्षी सियासत की पोल-पट्टी खोलने वाला यह विश्लेषण देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से शुरू होता है. जुलाई 1949 में नेहरू ने देशवासियों से कहा था कि पॉलिश किया हुआ चावल सेहत के लिए ठीक नहीं है और लोगों को इसके विकल्प के रूप में शकरकंद का उपयोग करना चाहिए. माना जा सकता है कि देश तब नया-नया आजाद हुआ था और संसाधनों की कमी रही होगी.

लेकिन 1976 में इंदिरा गांधी के दौर में जो हुआ उसने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को हिला दिया. अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर बढ़ते दबाव का हवाला देते हुए जबरन नसबंदी कराई गई. उस वक्त देश के ऊपर कोई बाहरी आर्थिक संकट या युद्ध की स्थिति नहीं थी फिर भी जनता पर यह फैसला थोपा गया.

UPA सरकार: ‘पैसे पेड़ पर नहीं लगते’ और ‘पेट्रोल पंप बंद’ का दौर
साल 2012 और 2013 के वे दिन याद कीजिए जब केंद्र में सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार थी. सितंबर 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेट्रोल-डीजल और एलपीजी से सब्सिडी हटाते हुए देश को दो-टूक कहा था कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते. यह बयान तब आया था जब देश में कोई युद्ध नहीं चल रहा था.

हद तो तब हो गई जब 2013 में पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने एक अजीबोगरीब प्रस्ताव रखा. उन्होंने सुझाव दिया कि देश में ईंधन की बचत के लिए रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक पेट्रोल पंप बंद रखे जाएं. उस समय न तो कोई वैश्विक मंदी थी और न ही तेल की आपूर्ति में कोई बड़ी बाधा, फिर भी सरकार ने जनता की सुविधा पर प्रहार करने वाला सुझाव दिया था.

चिदंबरम की अपील, ‘सोना मत खरीदो’
उसी साल यानी 2013 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बैंकरों से एक खास अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि बैंक अपने ग्राहकों को सोना खरीदने के लिए प्रोत्साहित न करें (Discourage करें). विदेशी मुद्रा भंडार में आ रही कमी का हवाला देकर लोगों की निजी पसंद और निवेश की आजादी पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई थी. सवाल यह है कि जब कांग्रेस की सरकारों ने लोगों को चावल, चीनी, ईंधन और सोने के उपयोग पर नसीहतें दीं, तब उसे प्रशासनिक समझ कहा गया. लेकिन आज जब प्रधानमंत्री मोदी आत्मनिर्भर भारत के तहत ईंधन की बचत की बात करते हैं तो वही लोग इसे मुद्दा बनाकर अपमानजनक टिप्पणियों पर उतर आते हैं.

सवाल-जवाब
क्या मनमोहन सरकार ने भी पेट्रोल पंप बंद करने का प्रस्ताव दिया था?

हाँ, 2013 में यूपीए सरकार के मंत्री वीरप्पा मोइली ने ईंधन बचाने के लिए रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक पेट्रोल पंप बंद रखने का प्रस्ताव दिया था.

चिदंबरम ने सोना खरीदने से क्यों मना किया था?

तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) के गिरते स्तर को संभालने के लिए जनता से सोना न खरीदने की अपील की थी.

नेहरू ने चावल की जगह क्या खाने की सलाह दी थी?

पंडित नेहरू ने 1949 में सेहत और संसाधनों का हवाला देते हुए पॉलिश चावल के बजाय शकरकंद खाने का सुझाव दिया था.

By uttu

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