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1996 में अटल बिहारी वाजपेयी… उमर अब्दुल्ला क्या कहना चाहते हैं? नेशनल कॉन्फ्रेंस में कोई एकनाथ शिंदे नहीं

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1996 में अटल बिहारी वाजपेयी… उमर अब्दुल्ला आखिर क्या कहना चाहते हैं?

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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि एलओपी सीएम की कुर्सी पाने का इंतजार कर रहे हैं. एनसी में भारी टूट की अफवाह फैलाकर गेम खेला जा रहा है. उमर ने कहा, ‘हमारी पार्टी में कोई एकनाथ शिंदे बिल्कुल नहीं है’. महाराष्ट्र में बीजेपी ने शिवसेना तोड़ने में शिंदे की मदद की थी.

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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि परिसीमन सिर्फ बीजेपी के फायदे के लिए हुआ.

श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और यूटी विधानसभा में उसके नेता पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया. अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता (एलओपी) सुनील शर्मा किसी भी तरह से जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने का इंतजार कर रहे हैं.

शर्मा ने कहा था कि सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) में टूट हो सकती है. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि एलओपी को याद रखना चाहिए कि यहां 2029 से पहले चुनाव नहीं होने वाले हैं और यह कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में कोई एकनाथ शिंदे नहीं है. कोई भी पार्टी छोड़कर नहीं जा रहा है.

उनका इशारा शिवसेना के उस वरिष्ठ नेता की ओर था, जिसने पार्टी को तोड़ा था और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार के गिरने का कारण बना था. अब्दुल्ला ने कहा कि लोगों को शर्मा के बयान से भाजपा के इरादों को समझना चाहिए. एकनाथ शिंदे इसलिए चले गए, क्योंकि भाजपा ने उन्हें पार्टी छोड़ने में मदद की थी. लोगों को एलओपी के बयान के जरिए भाजपा के इरादों को समझना चाहिए. हम उनके हाथों पहले ही बहुत कुछ भुगत चुके हैं.

उन्‍होंने जोर देकर कहा कि यहां परिसीमन सिर्फ भाजपा और उसके समर्थकों की मदद करने के इरादे से किया गया था. वे राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर लोगों को धमका रहे हैं. ऐसा नहीं लगता कि उनका जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का कोई इरादा है. यहां कैबिनेट का विस्तार इसलिए नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने हमें राज्य का दर्जा नहीं दिया है और इस अफवाह में कोई सच्चाई नहीं है कि हम टूट के डर से कैबिनेट विस्तार में देरी कर रहे हैं.

तमिलनाडु की स्थिति पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का कोई कारण नहीं है. उमर अब्दुल्ला ने याद दिलाया कि 1996 में राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेयी को सबसे बड़ी पार्टी के नेता के तौर पर केंद्र में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. जब वे लोकसभा में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए, तो वह सरकार 13 दिनों के बाद गिर गई थी. सीएम ने पूछा कि तमिलनाडु के लिए अलग पैमाना क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है, सिर्फ इसलिए कि वहां चुनावों में भाजपा बहुमत हासिल करने में नाकाम रही?

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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