दिल्ली दंगा केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, 10 आरोपियों को कर दिया बरी
Last Updated:
Delhi Riot Case: यह मामला भजनपुरा थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था. पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान आरोपी एक उग्र भीड़ का हिस्सा थे, जिसने इलाके में एक दुकान को लूटने के बाद आग के हवाले कर दिया था. आरोपियों पर दंगा, आगजनी, आपराधिक साजिश, गैरकानूनी जमावड़ा और सरकारी आदेश की अवहेलना जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं.

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में 10 आरोपियों को बरी कर दिया है.
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में 10 आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा और आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त व पुख्ता सबूत पेश नहीं किए जा सके.
यह मामला भजनपुरा थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था. पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान आरोपी एक उग्र भीड़ का हिस्सा थे, जिसने इलाके में एक दुकान को लूटने के बाद आग के हवाले कर दिया था. आरोपियों पर दंगा, आगजनी, आपराधिक साजिश, गैरकानूनी जमावड़ा और सरकारी आदेश की अवहेलना जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं.
कोर्ट ने क्यों किया बरी?
इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह कर रहे थे. 16 अप्रैल को दिए गए अपने आदेश में जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जिन वीडियो क्लिप्स के आधार पर आरोपियों की पहचान का दावा किया था, वे अदालत में साबित नहीं हो सके.
जज ने स्पष्ट रूप से कहा, ‘मेरे तमाम प्रयासों के बावजूद, मैं वीडियो में दिख रहे दंगाइयों के चेहरों को अदालत में मौजूद आरोपियों से जोड़ नहीं पाया.’ इस कारण अदालत ने अभियोजन के दावों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
गवाहों की गवाही भी कमजोर
अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष के दो मुख्य गवाहों की गवाही मामले को मजबूत करने में असफल रही. दोनों गवाहों ने माना कि उन्होंने खुद दुकान को लूटे जाने या आग लगाए जाने की घटना को होते हुए नहीं देखा था. इससे केस और कमजोर हो गया.
‘संदेह से परे’ साबित नहीं हो पाया केस
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोप ‘संदेह से परे’ साबित होना जरूरी होता है, लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हो पाया. जज ने अपने आदेश में कहा, ‘अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को सभी उचित संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है. इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया जाता है.’
क्या था पूरा मामला?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. उसी दौरान भजनपुरा इलाके में एक दुकान को लूटने और जलाने का मामला सामने आया था, जिसमें इन 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था.
इस फैसले के बाद अब यह देखना होगा कि क्या दिल्ली पुलिस इस मामले में उच्च अदालत का रुख करती है या नहीं. फिलहाल, सबूतों के अभाव में अदालत ने सभी आरोपियों को राहत दे दी है.
About the Author
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें
