Wed. Apr 15th, 2026

मह‍िला आरक्षण पर INDIA अलायंस शोर तो मचा रहा, लेकिन क्‍या सरकार को रोक पाएगा? क‍िसके पास पास क‍ितने नंबर

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संसद का तीन दिन का विशेष सत्र आज से शुरू होने जा रहा है. मुद्दा है ‘महिला आरक्षण बिल’ यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पास करना. सीधे तौर पर लगेगा क‍ि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है, तो इसमें विपक्ष को क्या दिक्कत हो सकती है? लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ऐलान कर दिया कि ‘INDIA गठबंधन’ इस बिल के खिलाफ वोट करेगा. आख‍िर जो पार्टियां बरसों से महिला आरक्षण की वकालत कर रही हैं, वो अचानक इसके खिलाफ क्यों खड़ी हो गईं? और सबसे बड़ा सवाल कि अगर विपक्ष एक हो भी जाए, तो क्या वो संसद में मोदी सरकार को यह बिल पास कराने से रोक पाएगा?

मोदी सरकार महिला आरक्षण तो लाना चाहती है, लेकिन सरकार ने इसे एक ऐसी शर्त के साथ जोड़ दिया है जिसने विपक्ष की रातों की नींद उड़ा दी है. यह शर्त है परिसीमन. सरकार ने जो ड्राफ्ट बिल सांसदों को भेजा है, उसके मुताबिक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तब मिलेगा, जब देश में परिसीमन हो जाएगा.

प्लान क्या है और कब लागू होगा?

2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटों को बढ़ाया जाएगा. अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 850 तक करने का प्लान है. सरकार चाहती है कि नए परिसीमन और नई सीटों के बंटवारे के बाद, 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण को लागू किया जाए. यानी सरकार का कहना है कि नए जनगणना के आंकड़ों का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, 2011 के आंकड़ों पर ही सीटों की बाउंड्री फिर से खींच दो और सीटें बढ़ा दो. और जब सीटें 850 हो जाएं, तब उसमें से 33 फीसदी महिलाओं को दे दो.

विपक्ष को क्यों आ रहा है गुस्सा?

बुधवार को मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर INDIA गठबंधन के दिग्गज नेताओं का भारी जमावड़ा लगा. राहुल गांधी, आरजेडी के तेजस्वी यादव, टीएमसी की सागरिका घोष, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, डीएमके के टीआर बालू, और वर्चुअली जुड़े सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव… सबने मिलकर माथापच्ची की. विपक्ष का कहना है कि सरकार की नीयत में खोट है. कांग्रेस के जयराम रमेश ने साफ कहा कि बिल के पीछे की नीयत शरारतपूर्ण और धोखेबाज है. राहुल गांधी ने तो इसे देश के ख‍िलाफ बता द‍िया.

विपक्ष की मुख्य आपत्तियां क्‍या हैं?

’दक्षिण भारत’ का खौफ: यह सबसे बड़ा पेंच है. तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन समेत दक्षिण के सभी नेताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं. उनका तर्क है कि दक्षिण के राज्यों ने पिछले दशकों में फैमिली प्‍लानिंग में बेहतरीन काम किया और अपनी आबादी कंट्रोल की. वहीं हिंदी भाषी राज्यों यूपी, बिहार, एमपी में आबादी तेजी से बढ़ी. अब अगर जनसंख्या (2011 जनगणना) के आधार पर लोकसभा की सीटें 543 से 850 की जाएंगी, तो जाहिर है यूपी-बिहार की सीटें बेतहाशा बढ़ जाएंगी और दक्षिण की हिस्सेदारी संसद में सिकुड़ जाएगी. विपक्ष का कहना है कि ये आबादी कंट्रोल करने वाले राज्यों को ‘सजा’ देने जैसा है.

अभी क्यों नहीं, 2029 का इंतजार क्यों?

INDIA गठबंधन का कहना है कि अगर आपको महिलाओं को 33% आरक्षण देना ही है, तो जो मौजूदा 543 सीटें हैं, उन्हीं में दे दीजिए. इसके लिए परिसीमन का इंतजार क्यों करना? विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार इस बहाने आरक्षण को 2029 तक लटकाना चाहती है.

कोटा के अंदर कोटा यानी OBC/SC/ST की मांग

समाजवादी पार्टी, आरजेडी और मायावती (BSP) जैसी पार्टियों की पुरानी मांग है कि महिला आरक्षण के 33 फीसदी के अंदर ही दलित (SC), आदिवासी (ST) और पिछड़े वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा तय किया जाए. विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा बिल में इस ‘कोटा के अंदर कोटा’ की अनदेखी की गई है.

क्या मोदी सरकार के पास हैं पूरे नंबर?

चूंकि यह एक संविधान संशोधन बिल है, इसलिए इसे पास कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत ‘विशेष बहुमत’ की जरूरत होगी. विशेष बहुमत का मतलब है क‍ि सदन की कुल सदस्य संख्या का कम से कम 50% वोट होने चाहिए. सदन में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत होना चाह‍िए.

  • NDA जादुई आंकड़े से 71 कदम दूर: लोकसभा में सरकार (NDA) के पास अभी कुल 293 सांसद हैं (जिसमें अकेले बीजेपी के 240, टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सांसद शामिल हैं). लेकिन, महिला आरक्षण जैसे संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 364 वोटों की जरूरत है. इस लिहाज से मोदी सरकार जादुई आंकड़े से सीधे-सीधे 71 वोट पीछे है.
  • INDIA गठबंधन के पास ‘वीटो’ की ताकत: विपक्ष यानी INDIA ब्लॉक के पास 230 से 240 सांसदों की मजबूत फौज है, जिसकी अगुवाई कांग्रेस (98), सपा (37), टीएमसी (28) और डीएमके (22) कर रहे हैं. अगर ये सभी सांसद एकजुट रहते हैं और सदन में मौजूद रहकर बिल के खिलाफ वोट डालते हैं, तो वो आसानी से बिल को रोक सकते हैं.
  • ‘फुल हाउस’ में नामुमकिन है बिल पास होना: 543 सदस्यों वाली लोकसभा का गणित बिल्कुल साफ है… अगर वोटिंग वाले दिन सभी सांसद सदन में मौजूद रहते हैं और मतदान करते हैं, तो सरकार यह बिल पास नहीं करा पाएगी. सरकार की नैया तभी पार लग सकती है जब या तो विपक्ष में भारी क्रॉस-वोटिंग हो या फिर INDIA ब्लॉक के सांसद वोटिंग का बहिष्कार (वॉकआउट) कर दें, जिससे जरूरी बहुमत का आंकड़ा (364) नीचे आ जाए.

क्या ‘वॉकआउट’ बनेगा सरकार का ब्रह्मास्त्र?

सियासत में नंबर जितने सीधे दिखते हैं, उनका खेल उतना ही टेढ़ा होता है. विपक्ष के पास नंबर हैं, लेकिन यहीं पर एक बड़ा कानूनी दांव छिपा है जिसे ‘Present and Voting’ यानी उपस्थित और मतदान करने वाले… कहा जाता है. अगर विपक्ष के सांसद वोटिंग वाले दिन बिल के विरोध में सदन से वॉकआउट कर जाते हैं या वोटिंग से गैरहाजिर रहते हैं, तो सदन में मौजूद कुल सदस्यों की संख्या घट जाएगी.

इसे ऐसे समझ‍िए, मान लीजिए लोकसभा में INDIA ब्लॉक के 150 सांसद वॉकआउट कर गए. तो वोट करने वालों की संख्या 543 से घटकर 393 रह जाएगी. अब सरकार को 393 का दो-तिहाई यानी सिर्फ 262 वोट चाहिए होंगे. और NDA के पास तो 293 सांसद पहले से मौजूद हैं! बिल मक्खन की तरह पास हो जाएगा.

यही वजह है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश बार-बार जोर दे रहे हैं कि हमें सदन में डटे रहना है, बहस में हिस्सा लेना है और इसके खिलाफ वोट करना है. वॉकआउट किया, तो सरकार का काम आसान हो जाएगा. दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खामोश नहीं बैठे हैं. विशेष सत्र से पहले वो सभी दलों के ‘फ्लोर लीडर्स’ से संपर्क साध रहे हैं ताकि बीच का कोई रास्ता निकाला जा सके.

By uttu

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