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ट्रेनों में स्‍लीपर, एसी थर्ड जैसी कुल 9 श्रेणी के होते हैं कोच, ज्‍यादातर को नहीं होगा पता

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ट्रेनों में सफर करने वाले ज्‍यादातर यात्री स्‍लीपर क्‍लास, फर्स्‍ट, सेकेंड एसी जैसी कुछ श्रेणियों को ही जानते होंगे, लेकिन आपको पता है कि इस तरह की कुल नौ श्रेणियों के कोच होते हैं. जिसमें आप सफर करते हैं. अगर आजादी से पहले की बात करें तो केवल तीन श्रेणियों के होते थे.

ट्रेनों में स्‍लीपर, एसी थर्ड जैसी कुल 9 श्रेणी के होते हैं कोच, पता हैZoom

दो तिहाई को नॉन एसी है. जबकि एसी कोचों की संख्‍या केवल एक तिहाई है.

नई दिल्‍ली. ट्रेनों में सफर करने वाले ज्‍यादातर यात्री स्‍लीपर क्‍लास, फर्स्‍ट, सेकेंड एसी जैसी कुछ श्रेणियों को ही जानते होंगे, लेकिन आपको पता है कि इस तरह की कुल नौ श्रेणियों के कोच होते हैं. जिसमें आप सफर करते हैं. अगर आजादी से पहले की बात करें तो केवल तीन श्रेणियों के होते थे. इन्‍हीं में सभी लोग सफर करते थे. तो आइए जानते हैं कि इन नौ श्रेणियों में कौन-कौन से होते हैं और आजादी से पहले तीन श्रेणियां कौन सी होती हैं?

मौजूदा समय देशभर में 13000 से अधिक ट्रेनों का ऑपरेशन हो रहा है. इनमें 70000 से अधिक कोच लगते हैं. रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार करीब दो तिहाई कोच नॉन एसी के और एक तिहाई एसी श्रेणी के होते हैं. हालांकि एसी कोच में सफर करने वालों की संख्‍या 95 फीसदी और नॉन एसी में केवल 5 फीसदी है. इस सभी ज्‍यादातर कोच स्‍लीपर श्रेणी के ही हैं.

आइए जानते हैं कि कोचों की श्रेणी

  • टिकट पर लिखा एस 1 का मतलब स्‍लीपर श्रेणी होता है. इसमें कोच एस2, एस3 आगे बढ़ते जाते हैं. ये सामान्य स्लीपर कोच होते हैं, जिनमें बिना एसी के यात्रा होती है.
  • बी1 का मतलब होता है थर्ड एसी कोच नंबर है. . इसमें तीन-तीन बर्थ (ऊपर, बीच, नीचे) होती हैं और पूरा कोच एसी होता है.
  • ए1 का मतलब सेकेंड एसी कोच होता है, जिसमें सिर्फ दो बर्थ (ऊपर और नीचे) होती हैं और इसमें पर्दे जैसी प्राइवेसी भी मिलती है.
  • एच1 कोच नंबर वाले फर्स्‍ट एसी कोच होते हैं. इसमें भी चार बर्थ होती है, लेकिन जगह ज्‍यादा होती है.
    सीसी यानी चेयर कार होती हैं. इसके अलावा एग्‍जक्‍यूटिव क्‍लास यानी ईसी भी हेाता है.
  • इसके अलावा जनरल क्‍लास होता है, जिसमें बगैर रिजर्वेशन यात्री सफर कर सकते हैं. वहीं, एक सेकेंड क्‍लास होता है, इसमें केवल बैठने के लिए सीटें होती हैं.
  • इसके अलावा फर्स्‍ट क्‍लास एसी में कूपे भी होता है, इसका किराया फस्‍ट एसी का होता है, लेकिन दो-दो लोगों के एक कूपे में ऊपर नीचे बर्थ होती है.

ब्रिटिश काल में कितनी होती थी श्रेणी
आजादी से पहले ट्रेनों में तीन श्रेणी के कोच होते थे. पहला फर्स्‍ट क्‍लास, दूसरा सेकेंड क्‍लास और तीसरा थर्ड क्‍लास होता था. इसी में सभी वर्ग के लोग सफर करते थे.

By uttu

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