अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को जोरदार तेजी दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई बाधित होने की आशंका और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजार में तेल करीब दो प्रतिशत तक चढ़ गया। अमेरिका की ओर से एकतरफा युद्धविराम घोषणा के बावजूद निवेशकों की चिंता कम नहीं हुई और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।
वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी लगभग दो प्रतिशत की तेजी के साथ 97.6 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
एमसीक्स पर भी दिखा दबाव
घरेलू वायदा बाजार एमसीक्स पर कच्चा तेल हालांकि दबाव में रहा और करीब 1 प्रतिशत यानी लगभग 100 रुपये टूटकर 9,077 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।
साप्ताहिक आधार पर देखें तो कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड पिछले शुक्रवार के मुकाबले अब तक 18.83 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जबकि WTI में करीब 17 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि बाजार फिलहाल भू-राजनीतिक जोखिमों को गंभीरता से ले रहा है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज में सैन्य गतिविधियां और समुद्री परिवहन में व्यवधान तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। यह मार्ग बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तनाव का सीधा असर वैश्विक कीमतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में तेल का रुझान सतर्क तेजी वाला बना हुआ है। कीमतों के लिए 99 डॉलर तत्काल रेजिस्टेंस है और इसके ऊपर मजबूती टिकने पर ब्रेंट 104.50 डॉलर से 110 डॉलर तक जा सकता है। वहीं गिरावट की स्थिति में 95 डॉलर पहला अहम सपोर्ट है, जबकि 90.80 से 88.50 डॉलर मजबूत आधार माना जा रहा है।
ट्रंप ने परमाणु हथियार के इस्तेमाल पर क्या कहा?
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक सैन्य ताकत से ही बड़ा नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सेना को क्षेत्र में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी छोटी नौकाओं को निशाना बनाने वाले अभियान शामिल हैं।
अलग रिपोर्टों में कहा गया है कि इस्राइल और लेबनान ने अपने युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है, लेकिन इसके बावजूद व्यापक क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह कम नहीं हुआ है।
उधर, कच्चे तेल की तेजी और वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी करीब एक प्रतिशत तक टूटे, जहां आईटी और फार्मा शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
