नासिक के Tata Consultancy Services (TCS) बीपीओ से जुड़ा कथित धर्मांतरण और उत्पीड़न का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. इस मामले में पुलिस जांच तेज हो गई है और अब संदिग्ध कर्मचारियों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है. जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन खातों में बाहरी स्रोतों से फंडिंग आई हो सकती है. पुलिस के मुताबिक, इस केस में अब तक 7 पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि निदा खान नाम की एक महिला अभी भी फरार है. इसी बीच निदा खान के परिवार ने सामने आकर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.
‘खरात का केस दबाने के लिए बेटी को फंसाया’
इंडिया टुडे टीवी से बातचीत में निदा खान के पिता ने कहा कि उनकी बेटी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं और यह पूरा मामला किसी और मुद्दे को दबाने के लिए बनाया गया है. उन्होंने दावा किया कि निदा का शिकायतकर्ता से कोई सीधा संपर्क तक नहीं था. सब कुछ फेक है और भोंदू बाबा अशोक खरात के मामले के दबाने के लिए हमारी बच्ची को फंसाया जा रहा है.
‘हमारी निदा कोई एचआर नहीं है, 15-16 हजार कमाती है’
निदा के पिता के अलावा उनके चाचा और मां ने भी इंडिया टुडे से बात की. उन्होंने कहा कि हम गरीब हैं तो हमको बदनाम कर रहे हैं. हमारी बच्ची कोई एचआर नहीं है, 15-16 हजार कमाती है.
परिवार ने आगे कहा कि उनकी बेटी ने कभी किसी पर धर्म परिवर्तन का दबाव नहीं बनाया और न ही किसी अन्य धर्म के देवी-देवताओं के खिलाफ कोई कमेंट किया है. परिजनों के अनुसार, निदा खान इस समय भिवंडी में अपने ससुराल में है और वह प्रेग्नेंट है. इस पूरे विवाद के कारण परिवार मानसिक रूप से काफी परेशान है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और बेवजह उनकी बेटी को निशाना बनाया जा रहा है.
‘निदा परिवार का सहारा बन रही थी’
परिवार ने खुद को आर्थिक रूप से कमजोर बताते हुए कहा कि निदा नौकरी कर परिवार का सहारा बन रही थी. उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका परिवार सभी धर्मों का सम्मान करता है और इस तरह के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है.
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है. फरार आरोपियों की तलाश जारी है और बैंक खातों की जांच के जरिए फंडिंग के एंगल को भी खंगाला जा रहा है. फिलहाल यह मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी.
टीसीएस के इस केस में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने कहा है कि ये बहुत सीरियस मामला है, हम लोग ध्यान दे रहे हैं. हम इसमें किसी को भी शील्ड नहीं करेंगे. हम लोगों ने सेंट्रल एजेंसी को भी जानकारी दी है, उनकी मदद ली जाएगी यहां धर्म परिवर्तन के बहुत बड़ा मॉड्यूल के तहत काम किया गया है, जांच करेंगे कि इसका दायरा कहां तक है.
हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर पुलिस ने किया भंडाफोड़
बताते चलें कि इस मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी, जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी में कार्यरत एक हिंदू महिला रमजान के रोजे रख रही थी. इसी सूचना के आधार पर पुलिस को संदेह हुआ और उन्होंने गुप्त रूप से जांच शुरू की, जो बाद में बड़े खुलासे तक पहुंची.
जांच के दौरान पुलिस ने महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में कंपनी में तैनात किया, ताकि अंदरूनी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. इन अधिकारियों ने परिसर के भीतर हो रही हर गतिविधि पर बारीकी से निगरानी रखी और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए.
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ टीम लीडर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे थे और कर्मचारियों को चुनकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहे थे. मामले का पर्दाफाश होने के बाद सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया गया, जबकि निदा खान नाम की एक आरोपी अब भी फरार बताई जा रही है.
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