ममता बनर्जी के दिमाग की उपज थी फुटबॉल की ये मूरत, सुवेंदु सरकार ने आज ढहाई
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Salt Lake Stadium Disputed Sculpture: पश्चिम बंगाल की नई सुवेंदु अधिकारी सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स पर कड़ा प्रहार करना शुरू कर दिया है. कोलकाता के मशहूर साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन की गई विवादित और अजीबोगरीब फुटबॉल प्रतिमा को शनिवार सुबह बुलडोजर से ढहा दिया गया. इस प्रतिमा पर पिछली टीएमसी सरकार का ‘बिश्वा बांग्ला’ लोगो लगा था. इसके साथ ही, राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए बकरीद (ईद-उल-जुहा) की पूर्व निर्धारित दो दिन की छुट्टियों को रद्द कर दिया है और अब सिर्फ एक दिन का अवकाश घोषित किया है.

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब पुरानी सरकार के प्रतीकों को हटाने का सिलसिला शुरू हो गया है. शनिवार सुबह कोलकाता के प्रतिष्ठित साल्ट लेक स्टेडियम के वीवीआईपी गेट के बाहर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला. यहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में लगाई गई एक बड़ी और विवादित फुटबॉल प्रतिमा को आधिकारिक निगरानी में पूरी तरह से ढहा दिया गया. इसके बाद से ही पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं.

यह कोई आम प्रतिमा नहीं थी, बल्कि इसे खुद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डिजाइन किया था. साल 2017 में फीफा अंडर-17 विश्व कप से ठीक पहले स्टेडियम के सौंदर्यीकरण के नाम पर इसे स्थापित किया गया था. इस नीले और सफेद रंग की संरचना में धड़ से कटे हुए दो पैर और उनके ऊपर एक बड़ी सी फुटबॉल रखी हुई दिखाई देती थी. इसके ऊपर टीएमसी सरकार का खास ‘बिश्वा बांग्ला’ लोगो भी प्रमुखता से लगाया गया था.

इस प्रतिमा की अजीबोगरीब बनावट को लेकर शुरुआत से ही भारी विवाद रहा है. फुटबॉल प्रेमी और कला समीक्षक इसके डिजाइन को समझ नहीं पाते थे. स्टेडियम में आने वाले ढेरों फैंस इसे लंबे समय से देखते आ रहे थे. कुछ लोग इसे मॉर्डन आर्ट का हिस्सा मानते थे, जबकि ज्यादातर आलोचकों का मानना था कि यह साल्ट लेक स्टेडियम की खेल भावना और ऐतिहासिक सुंदरता के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है और इसे यहां से हटाया जाना चाहिए.
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पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद नई बीजेपी सरकार बनते ही इस प्रतिमा का भविष्य तय हो गया था. हाल ही में राज्य के नए युवा मामलों और खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने इस पर कड़ा बयान दिया था. उन्होंने इस प्रतिमा को ‘अजीब और बेतुकी’ संरचना करार देते हुए स्पष्ट रूप से कहा था कि स्टेडियम जैसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खेल परिसर में ऐसी भद्दी और अजीबोगरीब मूर्ति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए.

खेल मंत्री के बयान के कुछ ही दिनों बाद, शनिवार सुबह पीडब्ल्यूडी और खेल विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में इस ढांचे को गिराने की कार्रवाई पूरी की गई. जब स्थानीय लोग और फुटबॉल फैंस वीवीआईपी गेट के पास पहुंचे, तो उन्हें ममता बनर्जी की डिजाइन की हुई यह प्रतिमा मलबे में तब्दील मिली. प्रतिमा के टूटने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गए, जिसके बाद लोगों के बीच इस पर तीखी बहस छिड़ गई है.

बीजेपी नेत्री कीया घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिमा के मलबे की तस्वीर साझा करते हुए तंज कसा. उन्होंने लिखा कि स्टेडियम के सामने लगी इस विवादित संरचना को आखिरकार ढहा दिया गया है, जैसा कि सरकार ने पहले ही वादा किया था. टीएमसी समर्थक इसे बदले की राजनीति बता रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे बंगाल की वास्तविक खेल संस्कृति की दिशा में एक जरूरी सुधार बता रही है.

1984 में बना साल्ट लेक स्टेडियम देश के सबसे प्रमुख फुटबॉल मैदानों में से एक है. यह मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसी दिग्गज टीमों का होम ग्राउंड रहा है. लाखों फुटबॉल फैंस की भावनाएं इस स्टेडियम से जुड़ी हैं. खेल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस ऐतिहासिक स्टेडियम की मजबूत और स्पष्ट ‘फुटबॉल पहचान’ को बहाल करने के लिए यह फैसला लिया गया है. पुरानी मूर्ति इस महान खेल विरासत के साथ मेल नहीं खाती थी.

अब जब पुरानी संरचना को हटा दिया गया है, तो उस जगह पर केवल नीचे के जूते और फुटबॉल का कुछ हिस्सा ही बचा है. खेल विभाग अब इस खाली जगह पर बंगाल की विरासत को दर्शाने वाले किसी महान और प्रसिद्ध फुटबॉलर की भव्य प्रतिमा लगाने पर विचार कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि वे यहां एक ऐसा प्रतीक स्थापित करना चाहते हैं, जो बंगाल की समृद्ध फुटबॉल विरासत को सच में दिखाए और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करे.

एक तरफ पुरानी सरकार के प्रतीकों को हटाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के वित्त विभाग ने सरकारी छुट्टियों को लेकर भी एक बड़ा बदलाव किया है. 22 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना (No. 1814-F(P2)) के अनुसार, राज्य सरकार ने ईद-उल-जुहा (बकरीद) के मौके पर 26 मई (मंगलवार) और 27 मई (बुधवार) को दी गई पूर्व घोषित सार्वजनिक छुट्टियों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. प्रशासन को मिली नई जानकारी के मुताबिक अब बकरीद 28 मई (गुरुवार) को मनाई जाएगी.
