नई दिल्ली (KG School Fees Viral Post). ज्यादातर पेरेंट्स अपने बच्चों की बढ़ती हुई स्कूल फीस से परेशान हैं. जरा सोचिए कि आपका बच्चा अभी ‘ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार’ बोलना सीख रहा है और उसके स्कूल की सालाना फीस किसी प्रीमियम MBA कॉलेज की किश्त जितनी हो! जी हां, सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा ही मामला गरमाया हुआ है, जिसने देशभर के माता-पिता की रातों की नींद उड़ा दी है. एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने सीनियर KG की फीस का ब्रेकडाउन सोशल मीडिया पर शेयर किया है.
यह तो केजी की फीस है जनाब!
साक्षी नाम की एक यूजर ने सोशल मीडिया पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए किसी स्कूल का फीस स्ट्रक्चर शेयर किया है. इस लिस्ट को देखकर किसी का भी सिर चकरा जाए. सीनियर केजी जैसे छोटे ग्रेड के लिए स्कूल ने कुल सालाना फीस ₹2,24,718 (करीब 2.25 लाख रुपये) कोट की है. साक्षी ने चुटकी लेते हुए लिखा, ‘ट्विंकल ट्विंकल सीखने की फीस 2.25 लाख रुपये!’
फीस का पूरा ब्रेकडाउन: कहां जा रहा है पैसा?
वायरल फीस रसीद के मुताबिक, माता-पिता को सिर्फ एडमिशन के नाम पर ₹15,000 और नॉन-रिफंडेबल कॉशन मनी के तौर पर ₹33,000 चुकाने होंगे. इसके अलावा ट्यूशन फीस, लाइब्रेरी और जिमखाना चार्जेस मिलाकर भारी-भरकम राशि बनती है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस 2.24 लाख रुपये के बिल में स्कूल यूनिफॉर्म, जूते, मोजे और दोपहर का खाना शामिल नहीं है. उसके लिए जेब और ढीली करनी होगी.
MBA की पढ़ाई या KG की क्लास?
सोशल मीडिया यूजर्स सीनियर केजी की स्कूल फीस की तुलना उच्च शिक्षा से कर रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि इतने में तो कोई स्टूडेंट सरकारी कॉलेज से इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट की डिग्री पूरी कर ले. लोगों ने गुस्से में पूछा कि स्कूल बच्चों को ऐसी कौन सी ‘जादुई शिक्षा’ दे रहा है जो एक सामान्य परिवार की साल भर की बचत के बराबर है.
अभिभावकों का दर्द और स्टेटस सिंबल का जाल
बहस के दौरान एक पहलू यह भी सामने आया कि कई बार पेरेंट्स सोसाइटी में नाम बनाए रखने के चक्कर में इन महंगे स्कूलों के जाल में फंस जाते हैं. कुछ यूजर्स ने सोशल मीडिया पोस्ट के कमेंट सेक्शन में तर्क दिया कि ये स्कूल अब शिक्षण संस्थान कम और ‘लग्जरी रिसॉर्ट्स’ ज्यादा बन गए हैं, जहां AC क्लासरूम और स्विमिंग पूल के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है.
सरकार से रेगुलेशन की मांग
इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर प्राइवेट स्कूलों की फीस पर सरकारी लगाम की जरूरत को हवा दे दी है. लोगों का कहना है कि अगर प्री-प्राइमरी शिक्षा इतनी महंगी होगी तो आम आदमी अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देने का सपना कैसे देखेगा? शायद यही वजह है कि कई पेरेंट्स छोटी क्लासेस में बच्चों को होमस्कूलिंग ही देने पर फोकस कर रहे हैं.
नोट- यह खबर वायरल पोस्ट के आधार पर है. न्यूज़18 हिंदी इस वायरल रसीद की पुष्टि नहीं करता है.
