पटना. बिहार में मंत्रिपरिषद विस्तार केवल सत्ता का बंटवारा नहीं, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए का एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई टीम में जहां जातिगत समीकरणों को जिस बारीकी से बुना गया है, वह साफ दर्शाता है कि भाजपा और जदयू ने मिलकर समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है. वहीं क्षेत्रीय आकांक्षाओं को प्रतिनिधित्व की कवायद के तहत बिहार के हर कोने को सत्ता में भागीदारी देने की एक सोची-समझी रणनीतिक कोशिश भी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई टीम में सीमांचल की तपिश से लेकर शाहाबाद के मैदानों और मिथिलांचल की विरासत तक का समावेश दिखा है. 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला बड़ा विस्तार है, जिसमें एनडीए ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य का कोई भी हिस्सा खुद को सरकार से अलग महसूस न करे.
बिहार मंत्रिपरिषद क्षेत्रीय समीकरण
क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए इस बार मिथिलांचल और चंपारण पर विशेष जोर दिया गया है. नीतीश मिश्रा और अरुण शंकर प्रसाद जैसे चेहरों को जगह देकर मिथिला के गढ़ को मजबूत किया गया है, तो वहीं नंद किशोर राम (रामनगर) और ई कुमार शैलेन्द्र (बिहपुर) के जरिए चंपारण और अंग क्षेत्र में भाजपा ने अपनी पैठ और गहरी की है. सीमांचल में दिलीप जायसवाल और लेसी सिंह का कद बरकरार रखा गया है, जबकि कोसी क्षेत्र से बुलो मंडल की एंट्री ने अति पिछड़ों के साथ क्षेत्रीय समीकरणों को भी साध लिया है. मगध से संतोष कुमार सुमन और शाहाबाद से जमा खान व संजय टाइगर के जरिए सरकार ने दक्षिण बिहार के राजनीतिक मिजाज को भी संतुलित रखने का प्रयास किया है.
बिहार के नए मंत्रियों के क्षेत्र
- क्षेत्रीय समीकरणों का समावेश,मिथिलांचल का दबदबा: इस विस्तार में मिथिलांचल का खास ख्याल रखा गया है. नीतीश मिश्रा, अरुण शंकर प्रसाद और श्वेता गुप्ता जैसे चेहरों को जगह देकर इस क्षेत्र के ब्राह्मण और वैश्य वोट बैंक को मजबूत किया गया है.
- सीमांचल और कोसी: इस क्षेत्र से दिलीप जायसवाल (पूर्णिया) और लेसी सिंह (धमदाहा) का कद बरकरार रखकर एनडीए ने यहां अपनी पैठ और गहरी की है. मधेपुरा से बुलो मंडल को शामिल करना ‘अंग’ और ‘कोसी’ क्षेत्र में अति पिछड़ों को साधने का बड़ा दांव है.
- शाहाबाद और मगध: शाहाबाद क्षेत्र से जमा खान और संजय टाइगर जैसे नेताओं के जरिए अल्पसंख्यक और राजपूत समीकरण साधे गए हैं. वहीं मगध से संतोष कुमार सुमन (गया) को फिर से शामिल कर दलित और महादलितों के बीच अपनी पकड़ मजबूत रखी गई है.
- तिरहुत और चंपारण: पश्चिमी चंपारण के नंद किशोर राम और सीतामढ़ी/शिवहर क्षेत्र से श्वेता गुप्ता की एंट्री तिरहुत प्रमंडल में एनडीए के विस्तार का संकेत है.
क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई टीम में जातिगत समीकरणों (Caste Equations) को जिस बारीकी से बुना गया है, वह साफ दर्शाता है कि भाजपा और जदयू ने मिलकर समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है. सवर्णों के रसूख, पिछड़ों की ताकत और दलितों की भागीदारी के बीच संतुलन बनाकर एनडीए ने नया सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया है..
जातिगत संतुलन की नई बिसात
इस विस्तार में सवर्ण समाज को बड़ा सम्मान दिया गया है. भाजपा ने विजय सिन्हा, नीतीश मिश्रा और संजय टाइगर जैसे चेहरों के जरिए भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत वोट बैंक को एकजुट रखने की कोशिश की है. वहीं जदयू ने लेसी सिंह और एलजेपीआर ने संजय सिंह को जगह देकर राजपूत समाज में अपनी पकड़ मजबूत की है. पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को इस कैबिनेट की रीढ़ माना जा सकता है. सम्राट चौधरी (कुशवाहा) के मुख्यमंत्री होने के साथ ही, श्रवण कुमार और निशांत कुमार के रूप में कुर्मी समाज, और दीपक प्रकाश व भगवान सिंह कुशवाहा के जरिए कुशवाहा समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है. इसके अलावा मल्लाह, कानू, धानुक, तेली और कलवार जैसी जातियों को शामिल कर ‘अति पिछड़ा’ कार्ड खेला गया है.
कैबिनेट विस्तार में शपथ लेने वाले मंत्रियों का जातिगत समीकरण, बीजेपी के मंत्रियों की सूची उनकी जाति
| मंत्रियों के नाम | मंत्रियों की जाति/पार्टी | मंत्रियों के नाम | मंत्रियों की जाति/पार्टी |
| विजय कुमार सिन्हा | भूमिहार, सवर्ण/बीजेपी | श्रवण कुमार | कुर्मी, पिछड़ा/जेडीयू |
| दिलीप जायसवाल | कलवार, वैश्य, पिछड़ा/बीजेपी | निशांत कुमार | कुर्मी, पिछड़ा/जेडीयू |
| रामकृपाल यादव | यादव, पिछड़ा/बीजेपी | मदन सहनी | मल्लाह, अति पिछड़ा/जेडीयू |
| मिथिलेश तिवारी | ब्राह्मण, सवर्ण/बीजेपी | लेसी सिंह | राजपूत, सवर्ण/जेडीयू |
| रमा निषाद | मल्लाह, अति पिछड़ा/बीजेपी | दामोदर रावत | धानुक, अति पिछड़ा/जेडीयू |
| केदार गुप्ता | कानू, वैश्य, अतिपिछड़ा/बीजेपी | श्रीभगवान सिंह कुशवाहा | कुशवाहा, पिछड़ा/जेडीयू |
| नीतीश मिश्रा | ब्राह्मण, सवर्ण/बीजेपी | बुलो मंडल | गंगोता, अति पिछड़ा/जेडीयू |
| प्रमोद चंद्रवंशी | चंद्रवंशी, अति पिछड़ा/बीजेपी | श्वेता गुप्ता | सूड़ी, वैश्य, पिछड़ा/जेडीयू |
| लखेंद्र पासवान | पासवान, दलित/बीजेपी | सुनील कुमार | रविदास, दलित/जेडीयू |
| संजय टाइगर | राजपूत, सवर्ण/बीजेपी | शीला मंडल | धानुक, अति पिछड़ा/जेडीयू |
| ई कुमार शैलेन्द्र | भूमिहार, सवर्ण/बीजेपी | रत्नेश सदा | मुसहर, दलित/जेडीयू |
| अरुण शंकर प्रसाद | सूड़ी, वैश्य, पिछड़ा/बीजेपी | जमा खान | मुस्लिम/जेडीयू |
| रामचंद्र प्रसाद | तेली, अति पिछड़ा/बीजेपी | अशोक चौधरी | पासी, दलित/जेडीयू |
| नंद किशोर राम | रविदास, दलित/बीजेपी | संजय पासवान | पासवान, दलित/एलजेपीआर |
| श्रेयसी सिंह | राजपूत, सवर्ण/बीजेपी | संजय सिंह | राजपूत, सवर्ण/एलजेपीआर |
| संतोष कुमार सुमन | मुसहर, दलित/हम | दीपक प्रकाश | कुशवाहा, पिछड़ा/आरएलएम |
दलित और अल्पसंख्यक समीकरण
दलितों और महादलितों को साधने के लिए इस बार कैबिनेट में लखेंद्र पासवान, सुनील कुमार, अशोक चौधरी, रत्नेश सदा और संतोष कुमार सुमन के जरिए पासवान, रविदास, पासी और मुसहर समाज को सीधे तौर पर जोड़ा गया है. यह रणनीतिक कदम चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के वोट बैंक को और मजबूत करने के लिए उठाया गया है. वहीं, सीमांचल और अल्पसंख्यक आबादी को संदेश देने के लिए जमा खान को जदयू कोटे से फिर से जगह दी गई है. कुल मिलाकर, यह मंत्रिमंडल विस्तार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे के साथ-साथ बिहार की जमीनी हकीकत यानी ‘जातिगत गोलबंदी’ का एक मुकम्मल चेहरा है.
विपक्ष के आगे बड़ी चुनौती
सम्राट चौधरी की इस नई कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ जातीय सतरंगी चादर बिछाने की कोशिश की गई है. वैश्य समाज से लेकर ईबीसी की छोटी-छोटी जातियों तक को मंत्री पद देकर एनडीए ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि ‘हर वर्ग’ की सरकार है. वहीं, बिहार मंत्रिपरिषद में क्षेत्रीय भागीदारी साफ तौर पर 2027 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर की गई है. उत्तर बिहार से लेकर दक्षिण बिहार तक और पूरब के सीमांचल से पश्चिम के चंपारण तक, मंत्रियों का चयन इस तरह किया गया है कि विकास और राजनीति का पहिया हर जिले में एक समान गति से घूमे. सम्राट चौधरी की इस ‘क्षेत्रीय सोशल इंजीनियरिंग’ ने विरोधियों के लिए अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है.
