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Aadhar Card:पश्चिम बंगाल में विदेशियों का कैसे बन रहा आधार कार्ड? बिहार में पकड़े गए जालसाजों ने बताया – Fake Aadhaar Card Racket With Nepal Connection Exposed Accused Arrested In Bihar Reveal Big Secrets

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सारण जिले के अमनौर थाना क्षेत्र से फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले एक बड़े गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसका तार नेपाल तक जुड़ा बताया जा रहा है। इस मामले में नेपाल मूल की एक युवती को भारत में अवैध रूप से ठहराने और उसके लिए फर्जी भारतीय पहचान पत्र तैयार कराने का मामला सामने आया है। सारण पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।

गिरफ्तार आरोपी ने क्या बताया?

मधुबनी जिले के लदनिया थाना क्षेत्र अंतर्गत सीमानगर गांव निवासी शिव नारायण यादव के 27 वर्षीय पुत्र जासुन कुमार यादव उर्फ जेपी यादव ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि वर्ष 2024 के दौरान कोलकाता में काम करने के समय उसकी मुलाकात नेपाल मूल की रहने वाली मुस्कान कुमारी से हुई थी। युवती का वीजा समाप्त हो जाने के बाद उसे भारत में रहने के लिए भारतीय पहचान पत्र की जरूरत पड़ी।

साइबर कैफे संचालक पर फर्जी आधार बनाने का आरोप

आरोप है कि लदनिया बाजार स्थित एक साइबर कैफे संचालक ने महज 3500 रुपए लेकर युवती का फर्जी आधार कार्ड तैयार कर दिया। जेपी यादव ने दावा किया है कि उसके पास मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्य मौजूद हैं, जो पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सकते हैं।

दूसरे आरोपी ने भी किए चौंकाने वाले खुलासे

वहीं दूसरी ओर सारण जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर नून नगर गांव निवासी ललन राय के 30 वर्षीय पुत्र नीरज राय ने भी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को दिए बयान में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। नीरज के अनुसार वर्ष 2022 में कोलकाता प्रवास के दौरान वह भी उसी युवती के संपर्क में आया था। उस समय वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद स्थानीय साइबर कैफे की मदद से उसका आधार कार्ड बनवाया गया था। हालांकि कुछ समय तक साथ रहने के बाद युवती अचानक गायब हो गई। अब जानकारी मिली है कि वह अमनौर क्षेत्र में ही छिपकर रह रही है।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, बड़े गिरोह की आशंका

फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने का मामला सामने आने के बाद सारण पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि आखिर बिना वैध दस्तावेजों के किसी विदेशी नागरिक का आधार कार्ड कैसे तैयार हो गया और इसमें साइबर कैफे संचालकों की क्या भूमिका रही।

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पुलिस जुटा रही तकनीकी साक्ष्य

पुलिस को आशंका है कि यह किसी बड़े गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो पैसे लेकर विदेशी नागरिकों के फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। इस संबंध में स्थानीय अमनौर थाने के थानाध्यक्ष हेमंत कुमार ने बताया कि तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और मामले में शामिल सभी लोगों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि फर्जी तरीके से सरकारी दस्तावेज बनाना और विदेशी नागरिक को अवैध रूप से शरण देना गंभीर अपराध है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

By uttu

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