
देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग; छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में 1 वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स को मिला अंतिम रूप।
रायपुर. छत्तीसगढ़ में बाल अधिकारों के संरक्षण और जागरूकता की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाया गया है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार 6 प्रमुख विश्वविद्यालय एक साथ एक मंच पर आए हैं। अवसर था छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में तैयार किए जा रहे एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) डिप्लोमा पाठ्यक्रम ‘रक्षक’ (Rakshak) को अंतिम रूप देने का।
बुधवार को राजधानी रायपुर में आयोजित एक दिवसीय अंतर्विश्वविद्यालयीन परामर्श बैठक में 6 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, कुलसचिवों और 50 से अधिक विभागाध्यक्षों व प्राध्यापकों ने दिनभर चले गहन मंथन के बाद इस विशेष पाठ्यक्रम के 8 प्रश्नपत्रों और उनकी उप-इकाईयों (Sub-units) को अंतिम रूप प्रदान किया।
’रक्षक’ सिर्फ कोर्स नहीं, एक सामाजिक अभियान
बैठक की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस पहल के दूरगामी परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक डिग्री या कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हमारा सामूहिक लक्ष्य इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू कर आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और जागरूक बनाना है।”
देश भर में अपने तरह की अनूठी पहल
आयोग ने कुछ समय पूर्व इस पाठ्यक्रम के संचालन के लिए प्रदेश के 6 विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू (MoU) साइन किया था। बैठक में उपस्थित सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने एक सुर में इस पहल की सराहना की। उनका मानना है कि किसी राज्य आयोग द्वारा बाल संरक्षण के लिए विश्वविद्यालयों को एक साथ लाकर इस तरह का अकादमिक ढांचा तैयार करना पूरे देश में एक अनूठा और अनुकरणीय उदाहरण है। पिछले 10 महीनों से इस पाठ्यक्रम को लेकर चल रहे मार्गदर्शन के लिए अकादमिक जगत ने आयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
बैठक में ये दिग्गज रहे मौजूद:
डॉ. वर्णिका शर्मा (अध्यक्ष, बाल आयोग) व श्री प्रतीक खरे (सचिव)
प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल (कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय)
प्रो. मनोज दयाल (कुलपति, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय)
डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय (कुलपति, एमिटी यूनिवर्सिटी)
डॉ. टी. रामाराव (कुलपति, आंजनेय विश्वविद्यालय)
डॉ. संदीप श्रीवास्तव (कुलपति, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल विश्वविद्यालय)
सुनील कुमार शर्मा (कुलसचिव, कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय)
प्रवीण अग्रवाल व समय नारायण उपाध्याय (संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय)
पारस्परिक सहयोग से तैयार हुआ सिलेबस
बैठक के द्वितीय सत्र में सभी विश्वविद्यालयों ने अपने-अपने हिस्से के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों पर विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया। इस दौरान एक-दूसरे के ड्राफ्ट पर सुझाव मांगे गए और आवश्यक संशोधनों को तुरंत सिलेबस में शामिल किया गया। इस सहयोगात्मक रवैये ने सुनिश्चित किया है कि ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम बाल संरक्षण के हर कानूनी, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू को कवर करेगा।
