नई दिल्ली: एशिया के आसमान में इस वक्त ताकत की सबसे बड़ी लड़ाई चल रही है. चीन अपने HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर लगातार शक्ति प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन भारत अब उससे कई कदम आगे बढ़ता दिख रहा है. रूस से मिलने वाली S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी स्क्वाड्रन सिर्फ एक सैन्य खरीद नहीं है, बल्कि यह भारत के ‘आयरन शील्ड’ को और मजबूत करने वाला कदम है. आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन पर नहीं लड़े जाते. असली लड़ाई आसमान में होती है, जहां मिसाइलें, ड्रोन और स्टील्थ फाइटर गेम बदल देते हैं. ऐसे में S-400 भारत के लिए किसी सुदर्शन चक्र से कम नहीं माना जा रहा. यह सिस्टम दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और यहां तक कि स्टील्थ एयरक्राफ्ट को भी सैकड़ों किलोमीटर दूर से ट्रैक कर खत्म कर सकता है. दुनिया के कई बड़े सैन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि S-400 आज भी दुनिया के सबसे घातक एयर डिफेंस सिस्टम्स में गिना जाता है. भारत ने इसे सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं बल्कि चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को ध्यान में रखकर खरीदा था. चौथी स्क्वाड्रन के आने से भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क और ज्यादा घना और खतरनाक हो जाएगा.
भारत ने 2018 में रूस के साथ करीब 5.43 बिलियन डॉलर की डील में पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीदने का फैसला किया था. अब तक तीन स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना को मिल चुकी हैं और चौथी की डिलीवरी इस हफ्ते शुरू हो रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद इस डील का जारी रहना अपने आप में बड़ा संकेत है. भारतीय अधिकारियों ने रूस में जाकर सिस्टम का प्री-डिस्पैच इंस्पेक्शन भी पूरा किया है. S-400 की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-लेयर सुरक्षा क्षमता है. यह अलग-अलग रेंज की मिसाइलों के जरिए दुश्मन के कई टारगेट्स को एक साथ निशाना बना सकता है. भारत अब इसे अपने स्वदेशी सिस्टम्स जैसे आकाश, MRSAM और रडार नेटवर्क के साथ भी जोड़ रहा है. इससे देश की हवाई सुरक्षा कई गुना मजबूत होने वाली है.
एस-400 मिसाइल सिस्टम भारत आ रहा है.
S-400 की स्क्वाड्रन में कितनी होती हैं बैटरियां?
- S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की एक स्क्वाड्रन में आमतौर पर दो बैटरियां होती हैं. हर बैटरी में 6 से 8 लॉन्चर लगे रहते हैं. इन लॉन्चर्स पर अलग-अलग रेंज की मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं. एक बैटरी में करीब 128 मिसाइलें तैयार रहती हैं. यानी पूरी एक स्क्वाड्रन में लगभग 256 मिसाइलें लॉन्च के लिए तैयार हो सकती हैं. यही वजह है कि इसे ‘फ्लाइंग किलर’ कहा जाता है. यह सिस्टम 120 किमी से लेकर 380 किमी तक की दूरी पर दुश्मन के टारगेट्स को मार सकता है.
- S-400 की खासियत सिर्फ इसकी रेंज नहीं है. यह एक साथ कई टारगेट्स को ट्रैक और एंगेज कर सकता है. इसका रडार सिस्टम सैकड़ों किलोमीटर दूर तक दुश्मन की गतिविधियों को पकड़ लेता है. अगर दुश्मन बैलिस्टिक मिसाइल दागे या स्टील्थ फाइटर भेजे, तो S-400 उन्हें हवा में ही खत्म करने की क्षमता रखता है. यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम्स में गिना जाता है.
चीन के HQ-9B से कितना ताकतवर है S-400?
चीन का HQ-9B सिस्टम भी लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता रखता है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि S-400 उससे ज्यादा एडवांस्ड है. S-400 की मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग क्षमता बेहतर है और इसकी मिसाइल रेंज भी ज्यादा मानी जाती है. यह सिस्टम स्टील्थ टारगेट्स और हाइपरसोनिक खतरों के खिलाफ भी ज्यादा प्रभावी माना जाता है. भारत के लिए इसकी तैनाती चीन और पाकिस्तान दोनों को स्पष्ट संदेश देती है.
चौथी स्क्वाड्रन से कितना मजबूत होगा भारत?
चौथी स्क्वाड्रन के आने के बाद भारत की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर एयर डिफेंस कवरेज और मजबूत हो जाएगी. इससे पाकिस्तान और चीन की ओर से आने वाले हवाई खतरों का जवाब तेजी से दिया जा सकेगा. भारतीय वायुसेना अब S-400 को अपने स्वदेशी नेटवर्क के साथ जोड़ रही है ताकि पूरे देश के लिए इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस शील्ड तैयार हो सके.
भविष्य में और घातक होगा भारत का एयर डिफेंस
भारत सिर्फ विदेशी सिस्टम्स पर निर्भर नहीं रहना चाहता. DRDO और भारतीय कंपनियां अब स्वदेशी एयर डिफेंस तकनीकों पर तेजी से काम कर रही हैं. S-400 को भारतीय सिस्टम्स के साथ जोड़ने से भविष्य में एक ऐसा नेटवर्क तैयार होगा जो किसी भी बड़े हवाई हमले को रोकने में सक्षम होगा. यही वजह है कि एशिया की रणनीतिक राजनीति में अब भारत का एयर डिफेंस बड़ा फैक्टर बन चुका है.
S-400 की एक स्क्वाड्रन में कुल कितनी मिसाइलें होती हैं?
सामान्य रूप से एक S-400 स्क्वाड्रन में दो बैटरियां होती हैं. हर बैटरी में 6-8 लॉन्चर और करीब 128 मिसाइलें तैनात रहती हैं. इस तरह पूरी स्क्वाड्रन में लगभग 256 मिसाइलें तैयार रहती हैं. जरूरत के अनुसार कॉन्फिगरेशन बदला भी जा सकता है. यही इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है.
S-400 दुश्मन की मिसाइलों को कैसे रोकता है?
S-400 का हाई-एंड रडार सिस्टम सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन की मिसाइल, ड्रोन या फाइटर जेट को ट्रैक कर लेता है. इसके बाद सिस्टम सही रेंज की मिसाइल चुनकर टारगेट को हवा में ही नष्ट कर देता है. इसकी मल्टी-लेयर क्षमता इसे बेहद घातक बनाती है.
भारत के लिए चौथी स्क्वाड्रन कितनी अहम है?
चौथी स्क्वाड्रन के आने से भारत की एयर डिफेंस कवरेज और ज्यादा मजबूत होगी. खासकर चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ेगी. पांचवीं स्क्वाड्रन आने के बाद भारत का पूरा S-400 नेटवर्क लगभग पूर्ण रूप से ऑपरेशनल हो जाएगा.
