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ISI का सीसीटीवी जासूसी वेब टोल प्लाजा तक फैला, टार्गेट पर देश की लाइफ लाइन

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ISI का सीसीटीवी जासूसी वेब टोल प्लाजा तक फैला, टार्गेट पर देश की लाइफ लाइन

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ISI Solar CCTV Spying Network: आईएसआई का सोलर सीसीटीवी जासूसी नेटवर्क बेनकाब हो गया है. यह नेटवर्क टोल प्लाजा और रेलवे स्टेशनों से लाइव डेटा पाकिस्तान भेज जा रहा था. गाजियाबाद पुलिस ने कई मॉड्यूल पकड़े हैं. इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं.

ISI का सीसीटीवी जासूसी वेब टोल प्लाजा तक फैला, टार्गेट पर देश की लाइफ लाइनZoom

आईएसआई द्वारा सीसीटीवी के जरिए देश के टॉल प्लाजा की रेकी का खुलासा हुआ है.

ISI Solar CCTV Spying Network: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा भारत में चलाए जा रहे सीसीटीवी आधारित जासूसी नेटवर्क की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रेलवे स्टेशनों और सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा आरोपी व्यक्तियों को देश भर के टोल प्लाजा पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए थे. जांचकर्ताओं के अनुसार टोल प्लाजा पर यातायात और सुरक्षा संबंधी डेटा एकत्र करने के कई उद्देश्य हो सकते थे. टोल प्लाजा पर आतंकवादी हमला करने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है और आवश्यक सामान ले जा रहे वाहनों को निशाना बनाया जा सकता है. एक अधिकारी ने बताया कि टोल प्लाजा का रीयल-टाइम डेटा आतंकियों और नशीले पदार्थों के तस्करों के लिए हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स की तस्करी में मददगार साबित होता है.

इसके अलावा इस डेटा से घात लगाकर हमले की योजना बनाई जा सकती है या कार बम विस्फोट की तैयारी की जा सकती है, जिससे भारी जान-माल की हानि और यातायात ठप हो सकता है. फरीदाबाद मॉड्यूल की जांच में पता चला था कि आरोपी उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में कार बम विस्फोटों की योजना बना रहे थे. जम्मू-कश्मीर में मॉड्यूल का पता चलने और जब्ती शुरू होने के बाद एक आरोपी ने घबराकर दिल्ली के लाल किले के पास कार बम विस्फोट कर दिया. टेरर ग्रुप्स में कार बम हमलों की मांग बढ़ रही है. भारत में वर्तमान में 1,000 से अधिक टोल प्लाजा संचालित हैं, जिनमें से हर एक पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं.

आईएसआई के मॉड्यूल की योजना प्रमुख टोल प्लाजा पर सोलर-पावर्ड सीसीटीवी कैमरे लगाकर अधिक से अधिक डेटा खींचने की थी. गाजियाबाद पुलिस की जांच से यह मॉड्यूल पकड़ा गया, जिसमें लगभग 50 स्थानों पर कैमरे लगाने की कोशिश की जा रही थी. इनमें रेलवे स्टेशन, भीड़भाड़ वाले इलाके और सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे. मॉड्यूल ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर कम से कम दो कैमरे सफलतापूर्वक लगा दिए थे. ये कैमरे 15 दिनों तक लाइव फुटेज पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजते रहे, जिन्हें 18 मार्च को हटा दिया गया.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद आईएसआई की नई रणनीति

खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के बाद आईएसआई अपनी रणनीति बदल रही है. इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंक नेटवर्क को तोड़ा गया, जिससे आईएसआई की पारंपरिक जासूसी क्षमता भारत के अंदर काफी हद तक ध्वस्त हो गई. इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने कई जासूसी मॉड्यूल को पकड़ा. इनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा से जुड़ा मॉड्यूल भी शामिल था, जो न केवल संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने बल्कि पाकिस्तान को सकारात्मक छवि देने का काम भी करती थी. एक के बाद एक मॉड्यूल पकड़े जाने के बाद आईएसआई ने कम लागत वाला नया इंटेलिजेंस गेदरिंग मॉड्यूल तैयार किया. इसमें सोलर-पावर्ड सीसीटीवी कैमरे लगाकर संवेदनशील, महत्वपूर्ण और भीड़भाड़ वाले स्थानों की लाइव फुटेज स्ट्रीम करने की योजना थी.

कैमरा लगाने वाले ऑपरेटिव्स को मात्र 8,000 से 10,000 रुपये दिए जाते थे. इस मॉड्यूल के पकड़े जाने के बाद सीसीटीवी खरीद की बड़ी ऑडिट शुरू हो गई है, खासकर चीन निर्मित कैमरों की. कई मामलों में चीनी क्लाउड सर्विस के जरिए फुटेज पाकिस्तान तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है.

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ी

यह घटनाक्रम भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है. टोल प्लाजा जैसी सार्वजनिक सुविधाओं पर जासूसी से आतंकियों को रीयल-टाइम डेटा मिलने का खतरा बढ़ जाता है. गाजियाबाद पुलिस की शुरुआती जांच अब दिल्ली पुलिस, आईबी और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर देशव्यापी स्तर पर फैल गई है. कई राज्यों में सोलर सीसीटीवी नेटवर्क की जांच चल रही है.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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